
रिपोर्ट – संजीव मिश्रा
Kashmir Silk Industry Revival : कश्मीर में हालात सामान्य होने के साथ अब पारंपरिक उद्योगों की वापसी तेज होती दिख रही है। खासतौर पर रेशम उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार की पहल रंग लाती नजर आ रही है।
केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा Ganderbal जिले के Manasbal Lake क्षेत्र में ‘सेरी टूरिज्म प्रोजेक्ट’ की स्थापना की गई है। इस प्रोजेक्ट के जरिए न केवल रेशम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं।
मानसबल झील के किनारे विकसित इस केंद्र में रेशम उत्पादन की पारंपरिक प्रक्रिया को फिर से जीवित किया गया है। यहां बड़े पैमाने पर मलबरी (शहतूत) के पेड़ लगाए गए हैं, जिन पर रेशम के कीटों का पालन किया जा रहा है। खासतौर पर ‘बम्बिक्स मोरी’ प्रजाति के जरिए उच्च गुणवत्ता का सिल्क तैयार किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्पादन में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का संतुलन रखा जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग को पूरा किया जा सके। कश्मीर का रेशम ऐतिहासिक रूप से भी काफी प्रसिद्ध रहा है और इसकी वैश्विक स्तर पर अच्छी मांग है।
इतिहास में भी कश्मीर के रेशम की खास पहचान रही है। बताया जाता है कि यहां निर्मित रेशम से बना तिरंगा 15 अगस्त 1947 को फहराया गया था, जिसे आज Fort St. George Museum में सुरक्षित रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सुरक्षा माहौल और सरकारी योजनाओं के चलते स्थानीय लोग एक बार फिर पारंपरिक व्यवसायों से जुड़ रहे हैं। यदि यह पहल लगातार जारी रही, तो कश्मीर का रेशम उद्योग न केवल अपनी पुरानी पहचान हासिल करेगा, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगा।



