
International News: नील कत्याल (Neal Katyal) ने हाल ही में अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय (US Supreme Court) में एक ऐसा ऐतिहासिक मुकदमा लड़ा, जिसमें उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ (आयात शुल्क) को असंवैधानिक ठहराया। यह मामला अमेरिकी संवैधानिक अधिकारों और सत्ता के विभाजन (Separation of Powers) के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नील कत्याल का जीवन और शिक्षा
नील कत्याल का जन्म अमेरिका के शिकागो शहर में भारतीय अप्रवासी माता-पिता के घर हुआ। उनके पिता एक डॉक्टर और माता एक इंजीनियर थीं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज से स्नातक की डिग्री और येल लॉ स्कूल से लॉ की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क के रूप में काम किया।
पेशेवर करियर
नील कत्याल ने अमेरिका के Acting Solicitor General के रूप में भी कार्य किया, जहां वे अमेरिकी सरकार का सुप्रीम कोर्ट में मुख्य वकील रहे। उन्होंने अब तक सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में पैरवी की है, जो अल्पसंख्यक वकीलों के बीच रिकॉर्ड माना जाता है। वर्तमान में वे Milbank LLP में पार्टनर और Georgetown University Law Center में प्रोफेसर हैं।
ट्रंप के टैरिफ मामले में भूमिका
नील कत्याल ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि टैरिफ असल में टैक्स की तरह है, और केवल कांग्रेस के पास इसे लगाने का अधिकार है। राष्ट्रपति के पास इसे अकेले आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाने का अधिकार नहीं है।
इस तर्क के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हैं और उन्हें संविधान में तय प्रक्रिया के तहत लागू करना होगा।
मामला और उसका महत्व
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यह मामला अमेरिकी संविधान में सत्ता के विभाजन (Separation of Powers) को मजबूत करता है।
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अमेरिकी व्यापार नीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखता है।
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भारतीय मूल के नील कत्याल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पेशेवर योग्यता और प्रभाव साबित किया।
मामले के कानूनी पहलू
टैरिफ को लेकर कत्याल ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:
संवैधानिक अधिकार: केवल कांग्रेस को टैक्स लगाने का अधिकार है।
राष्ट्रपति की शक्तियों का दुरुपयोग: आपातकालीन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति ने टैरिफ लगाया, जो संविधान के तहत मान्य नहीं।
कोर्ट ने इस दलील को मानते हुए फैसला सुनाया और राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश को चुनौती दी गई सीमाओं के भीतर असंवैधानिक ठहराया।
Written by: Anushri Yadav



