नई दिल्ली। होर्मुज से भारतीय जहाजों की निकासी ने लगाई कारगर विदेश नीति पर मुहर

नई दिल्ली। ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच भारत ने होर्मुज स्ट्रेट से अपने एलपीजी टैंकरों (जैसे— शिवालिक, नंदा देवी) की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर अहम कूटनीतिक सफलता हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईरानी नेतृत्व से बातचीत और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के नेतृत्व में ईरान के साथ निरंतर सीधे संवाद के जरिए भारत अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफल रहा। इस कदम ने जहां भारत की ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखा, वहीं यह देश की ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ और ‘न्यू इंडिया’ की बढ़ती वैश्विक ताकत को भी दर्शाता है।

हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 16 मार्च को एक तीसरा भारतीय जहाज भी इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित निकला है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से जारी तनाव के बावजूद भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद के रास्ते खुले रखे, जिससे भारतीय जहाजों को विशेष अनुमति मिल सकी। इस संकट के दौरान भारत ने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय बातचीत के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ सीधे संवाद से भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में मदद मिली। उन्होंने बताया कि वे लगातार ईरानी नेतृत्व के संपर्क में हैं और बातचीत के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इससे पहले वे फोन पर चार बार अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से चर्चा कर चुके हैं।

दूसरी ओर भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने हाल ही में कहा था कि भारत और ईरान के बीच मित्रतापूर्ण संबंध हैं और दोनों देशों के क्षेत्रीय हित भी साझा हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि बढ़ते तनाव के बीच भारतीय जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की अनुमति मिल सकती है।

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इसे भारत की सफल विदेश नीति और बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इस समुद्री मार्ग पर कई देशों के जहाज फंसे हुए हैं। ऐसे हालात में भारत ने सक्रिय और व्यावहारिक कूटनीति के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की क्षमता का प्रदर्शन किया है।

(रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी)

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