India Top Rice Producer: चावल की खेती में भारत नंबर-1, चीन को छोड़ा पीछे

India Top Rice Producer: भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बन चुका है। इसने चीन को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक कृषि परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव दर्ज किया है। यह उपलब्धि केवल उत्पादन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सरकारी नीतियों का समर्थन, खेती का दायरा बढ़ना, आधुनिक खेती के तरीके और मजबूत घरेलू मांग जैसे कई अहम कारण हैं।

1. चावल की खेती का बड़ा क्षेत्र

भारत में चावल की खेती का रकबा दुनिया में सबसे ज्यादा है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है। वहीं चीन में शहरीकरण और औद्योगीकरण के चलते खेती योग्य जमीन लगातार घटती जा रही है, जिससे वहां उत्पादन पर असर पड़ा है।

2. सरकारी नीतियों और समर्थन की भूमिका

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सरकारी खरीद, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), सस्ती बिजली और खाद जैसी सुविधाओं ने भारतीय किसानों को धान की खेती के लिए प्रोत्साहित किया। सरकार की यह गारंटी कि फसल खरीदी जाएगी, किसानों के जोखिम को कम करती है और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है।

3. उन्नत किस्में और कृषि तकनीक

हरित क्रांति की विरासत के साथ-साथ भारत ने अब उच्च उपज देने वाली और जलवायु के अनुकूल धान की किस्मों को अपनाया है। कम समय में पकने वाली और बाढ़ या सूखे को सहने वाली किस्मों ने बदलते मौसम के बावजूद उत्पादन को स्थिर बनाए रखा है।

4. कुल उत्पादन में बढ़त, लेकिन पैदावार की चुनौती

हालांकि भारत कुल उत्पादन में चीन से आगे निकल गया है, लेकिन प्रति हेक्टेयर पैदावार (यील्ड) अब भी चीन से कम है। चीन में बेहतर मशीनीकरण, प्रिसीजन फार्मिंग और संसाधनों के कुशल इस्तेमाल के कारण एक ही जमीन से ज्यादा उत्पादन होता है। भारत के लिए यह यील्ड गैप पाटना सबसे बड़ी चुनौती है।

5. पानी का संकट: भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती

धान की खेती में बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और पानी की कमी भारत की बढ़त के लिए खतरा बन सकते हैं। आने वाले समय में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), माइक्रो इरिगेशन और फसल विविधीकरण जैसे उपाय बेहद जरूरी होंगे।

6. वैश्विक मांग और निर्यात में मजबूती

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक भी है। बासमती और नॉन-बासमती चावल एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देशों में बड़े पैमाने पर भेजे जाते हैं। प्रतिस्पर्धी कीमतों और बड़े सरप्लस ने भारत की स्थिति को और मजबूत किया है, जबकि चीन मुख्य रूप से घरेलू खपत पर फोकस करता है।

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भारत का चीन को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनना एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन इस बढ़त को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए पैदावार बढ़ाना, पानी का समझदारी से प्रबंधन करना और जलवायु-अनुकूल खेती अपनाना बेहद जरूरी होगा। तभी यह सफलता एक स्थायी बढ़त में बदल पाएगी।

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