
Global Trade Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती लागत के कारण देश के वस्तु निर्यात में मार्च महीने के दौरान 7 से 8 फीसदी तक गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है। सरकार 15 अप्रैल को मार्च महीने के निर्यात के आधिकारिक आंकड़े जारी करेगी, जिससे स्थिति और साफ हो सकेगी।
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने बताया कि हालिया संघर्ष ने निर्यात पर गहरा असर डाला है। खासतौर पर अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ा, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
उन्होंने कहा कि इस संकट के कारण माल भाड़ा, हवाई परिवहन और बीमा लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से इस्पात, प्लास्टिक और रबर जैसे कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिससे निर्यातकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
फियो के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में भी वस्तु निर्यात में 2 से 3 फीसदी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर कुल निर्यात में 5 से 6 फीसदी की बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
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इस स्थिति से निपटने के लिए फियो ने सरकार को कुछ अहम सुझाव भी दिए हैं। इनमें उच्च ब्याज दरों में राहत, शुल्क छूट योजना के तहत भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाना और विदेश व्यापार महानिदेशालय तथा सीमा शुल्क विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर भारत के निर्यात के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
Written By: Kalpana Pandey



