नई दिल्ली। युद्धग्रस्त क्षेत्रों से नागरिकों की निकासी पर ‘मिशन मोड’ में काम कर रहे भारतीय मिशन

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत सरकार और विदेशों में स्थित भारतीय मिशन अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। भारतीयों की निकासी के लिए कई वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक करीब 2.44 लाख भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। युद्ध के बीच फंसे नागरिकों को वापस लाने के लिए एक ओर भारत सरकार पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ संपर्क में है, वहीं विदेशों में स्थित भारतीय मिशन पूरी तरह ‘मिशन मोड’ में काम कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि लगभग 700 भारतीय नागरिक ईरान से जमीनी मार्ग के जरिए आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंच चुके हैं, जहां से उनकी स्वदेश वापसी की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि ईरान गए 284 तीर्थयात्री भी सुरक्षित आर्मेनिया पहुंच गए हैं, जिनमें से 130 तीर्थयात्री आज दिल्ली पहुंचेंगे।

दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने कतर एयरवेज़ की उड़ानों के जरिए 1,600 से अधिक भारतीयों की निकासी में सहायता की है। साथ ही सऊदी अरब के लिए अस्थायी ट्रांज़िट वीज़ा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि सलवा सीमा के रास्ते जमीनी मार्ग से लौटने वाले नागरिकों को मदद मिल सके।

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विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर. महाजन ने बताया कि क्षेत्र में भारतीय मिशन चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। यूएई और ओमान से भारत के लिए लगातार उड़ानें संचालित की जा रही हैं, जिससे निकासी अभियान को गति मिल रही है।

(रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी)

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