10 मार्च, थिम्पू। भूटान में 1,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं पर काम करेगा भारत

10 मार्च, थिम्पू। भारत सरकार ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत पड़ोसी देश में कई विकास परियोजनाओं पर काम करने का फैसला किया है। भारत ने इन प्रोजेक्ट्स के लिए 1,000 करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया है। भारत और भूटान सरकार के बीच थिम्पू में 9 मार्च को तीसरी इंडिया-भूटान हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (एचआईसीडीपी) कमेटी की बैठक हुई, जिसमें यह फैसला लिया गया।

थिम्पू स्थित भारतीय दूतावास ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन अनिकेत जी. मांडवगने ने किया, जबकि भूटानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय और बाहरी व्यापार मंत्रालय के द्विपक्षीय विभाग की निदेशक पेमा त्शोमो ने किया।

दूतावास के अनुसार, भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए भारत सरकार ने 100 अरब न्गुल्ट्रम के कुल कमिटमेंट में से एचआईसीडीपी के लिए 10 अरब न्गुल्ट्रम, यानी करीब 1,000 करोड़ रुपये, की सहायता देने का वादा किया है। अब तक भारत सरकार एचआईसीडीपी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भूटान की शाही सरकार को 4.97 अरब न्गुल्ट्रम की राशि जारी कर चुकी है।

बैठक के दौरान कमेटी ने 3.2 करोड़ न्गुल्ट्रम की लागत वाले 5 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी और पहले तथा दूसरे चरण की परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। अब तक 8.46 अरब न्गुल्ट्रम की लागत के कुल 571 प्रोजेक्ट्स पर सहमति बन चुकी है, जिन्हें भारत और भूटान मिलकर लागू कर रहे हैं।

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एचआईसीडीपी के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं जो कम समय में पूरे किए जा सकते हैं और जिनका सीधा फायदा स्थानीय समुदाय को मिलता है। इनमें ग्रामीण कनेक्टिविटी, पीने के पानी की आपूर्ति, सिंचाई, कृषि ढांचा, बाढ़ सुरक्षा, पर्यटन विकास, शहरी ढांचा और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

गौरतलब है कि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत भूटान को कई क्षेत्रों में सहयोग दे रहा है, जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना प्रमुख है।

(रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी)

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