
Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के टेक्नोलॉजी-ड्रिवन विकास विजन को आगे बढ़ाते हुए Gorakhpur नगर निगम ने शहरी प्रबंधन में एक नई मिसाल कायम की है। यहां विकसित एआई आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम ने मानसून के दौरान जलभराव की समस्या में 65 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की है।
देश के पहले AI-आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (UFMC) की स्थापना गोरखपुर में की गई है, जिसे Prime Minister’s Office (PMO) और NITI Aayog ने भी सराहा है। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, IoT, डेटा एनालिटिक्स और फ्लड मॉडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर आधारित है।
नगर आयुक्त के अनुसार, इस सिस्टम के जरिए 24 घंटे पहले ही वर्षा और संभावित जलभराव का 80% तक सटीक पूर्वानुमान लगाया जा रहा है। सेंसर आधारित जलस्तर मॉनिटरिंग और ऑटोमेटिक पंपिंग सिस्टम के चलते जलभराव वाले क्षेत्रों में तुरंत कार्रवाई संभव हो पाती है।
कैसे काम करता है सिस्टम
जैसे ही नालों में जलस्तर बढ़ता है, सेंसर तुरंत अलर्ट भेजते हैं और ऑटोमैटिक पंपिंग सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इससे जलभराव की स्थिति बनने से पहले ही नियंत्रण किया जा सकता है। शहर में 28 जलभराव हॉटस्पॉट और 85 संवेदनशील पॉइंट्स को चिन्हित कर लगातार निगरानी की जा रही है।
बेहतर हुई आपदा प्रबंधन क्षमता
NITI Aayog के अनुसार, गोरखपुर मॉडल देशभर के शहरी निकायों के लिए एक उदाहरण बन सकता है। यह प्रणाली पारंपरिक रिएक्टिव मॉडल से आगे बढ़कर प्रोएक्टिव शहरी प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम है।
ऑटोमेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग
शहर के सभी पंपिंग स्टेशनों को पूरी तरह ऑटोमेटेड किया गया है। 24×7 कंट्रोल रूम से निगरानी की जाती है, जबकि नागरिकों के लिए ग्रीवांस पोर्टल भी तैयार किया गया है। 110 से अधिक वाटर लेवल सेंसर हर 2 से 15 मिनट में डेटा भेजते हैं, जिससे तुरंत निर्णय लिया जा सकता है।
शिकायतों के समाधान में तेजी
पहले जहां जलभराव की शिकायतों के समाधान में 10-12 घंटे लगते थे, अब यह समय घटकर 1-2 घंटे रह गया है। साथ ही पंप फेल होने की घटनाओं में 60% तक कमी आई है।



