
ED Raid Kolkata: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म है और इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। मामला सिर्फ एक छापेमारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीधी एंट्री, फाइलों को लेकर आरोप और बीजेपी पर साजिश के गंभीर इल्जाम भी जुड़ गए।
सबसे पहले समझिए— ED ने छापा क्यों मारा?
चुनाव से पहले ED ने IPAC (Indian Political Action Committee) के प्रमुख प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर और ऑफिस पर छापेमारी की।
IPAC एक राजनीतिक रणनीति बनाने वाली संस्था है, जो कई दलों के लिए चुनावी प्लानिंग करती रही है। बंगाल में इसे टीएमसी की रणनीति से जोड़कर देखा जाता है।
ED की टीम ने छापेमारी के दौरान:
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दस्तावेजों की जांच की
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डिजिटल डेटा खंगाला
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कुछ फाइलों और रिकॉर्ड्स को अपने कब्जे में लिया
यहीं से मामला राजनीतिक रंग लेने लगा।
टीएमसी ने इसे साजिश क्यों बताया?
ED की कार्रवाई के तुरंत बाद टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि:
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यह रेड चुनाव से पहले जानबूझकर कराई गई
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इसका मकसद टीएमसी की चुनावी रणनीति तक पहुंच बनाना है
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केंद्र सरकार और बीजेपी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है
टीएमसी का कहना है कि जब चुनाव नजदीक आते हैं, तब ऐसी कार्रवाइयां विपक्ष को डराने और कमजोर करने के लिए की जाती हैं।
ममता बनर्जी की एंट्री क्यों अहम मानी जा रही है?
मामला तब और गंभीर हो गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं।
आमतौर पर मुख्यमंत्री किसी ED कार्रवाई में सीधे हस्तक्षेप नहीं करतीं, लेकिन ममता का वहां जाना इस बात का संकेत था कि टीएमसी इस मुद्दे को राजनीतिक लड़ाई के तौर पर ले रही है।
ममता बनर्जी ने मौके पर:
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ED अधिकारियों से सवाल किए
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छापेमारी के उद्देश्य पर आपत्ति जताई
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खुले तौर पर बीजेपी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाए
उन्होंने कहा कि यह सब टीएमसी को चुनाव से पहले नुकसान पहुंचाने की साजिश है।
‘फाइल चोरी’ का आरोप क्या है?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ED की कार्रवाई का असली मकसद:
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टीएमसी की चुनावी रणनीति से जुड़ी फाइलें हासिल करना
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पार्टी की प्लानिंग को पहले से जान लेना
उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार की तरह किया जा रहा है।
बीजेपी ने क्या जवाब दिया?
बीजेपी ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
बीजेपी का कहना है कि:
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ED एक स्वतंत्र और संवैधानिक एजेंसी है
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कार्रवाई कानून के तहत हो रही है
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भ्रष्टाचार की जांच को चुनावी साजिश कहना गलत है
बीजेपी नेताओं का आरोप है कि टीएमसी जांच से डर रही है, इसलिए इसे राजनीतिक रंग दे रही है।
चुनाव से पहले यह मामला क्यों इतना अहम है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार:
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टीएमसी इसे पीड़ित बनाम केंद्र की लड़ाई के रूप में पेश करेगी
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बीजेपी इसे भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का उदाहरण बताएगी
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यह मुद्दा बंगाल चुनाव के नैरेटिव को प्रभावित कर सकता है
सीधी बात यह है कि यह मामला अब सिर्फ ED रेड नहीं रहा, बल्कि चुनावी राजनीति का बड़ा हथियार बन चुका है।
आगे क्या हो सकता है?
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ED की जांच आगे भी जारी रह सकती है
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टीएमसी सड़कों पर प्रदर्शन तेज कर सकती है
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मामला कोर्ट तक भी जा सकता है
फिलहाल, बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों तक चर्चा के केंद्र में बना रहने वाला है।



