दिल्ली का ग्राउंड वॉटर खतरनाक रूप से दूषित, सैंपल्स में मिला यूरेनियम-लेड और नाइट्रेट

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का भूजल तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की ताज़ा वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली के कई इलाकों से लिए गए पानी के नमूनों में यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट, क्लोराइड, फ्लोराइड और अधिक सैलिनिटी जैसे खतरनाक तत्व अनुमेय सीमा से कई गुना अधिक पाए गए हैं। यह स्थिति उन लाखों लोगों के लिए बेहद चिंताजनक है जो बोरवेल और हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, प्री-मानसून सीजन में दिल्ली देश में तीसरे सबसे ज्यादा ग्राउंडवॉटर कंटैमिनेशन वाले क्षेत्र के रूप में दर्ज की गई। लेड की अधिक मात्रा जहां बच्चों के मानसिक विकास पर असर डालती है, वहीं बढ़ा हुआ यूरेनियम किडनी डैमेज और कैंसर के जोखिम से जुड़ा पाया गया है।

दिल्ली के भूजल में नाइट्रेट स्तर भी खतरनाक पाया गया है, जिसका कारण कृषि गतिविधियां और गलत वेस्ट डिस्पोज़ल माना जा रहा है। इसके साथ ही सोडियम एडसॉर्प्शन रेशियो (SAR) और रेजिडुअल सोडियम कार्बोनेट (RSC) का स्तर भी कई जगहों पर अनुमेय सीमा से काफी ऊपर मिला है। कुछ इलाकों में SAR 179.8 तक पहुंच गया, जबकि RSC के 51% नमूनों में सीमा से अधिक स्तर दर्ज हुआ।

फ्लोराइड, नाइट्रेट और यूरेनियम के दूषण में भी वृद्धि

सेंट्रल ग्राउंडवॉटर बोर्ड की 2024-25 रिपोर्ट में इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC) में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2024 में जहां 23% सैंपल्स अनुमेय सीमा से ऊपर थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 33% से अधिक हो गया। इसी तरह फ्लोराइड, नाइट्रेट और यूरेनियम के दूषण में भी वृद्धि दर्ज की गई।

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