Lucknow/Varanasi: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जान से मारने की धमकी?

धमकी, गौ-रक्षा और गंगा मुद्दे पर तीखा बयान—शंकराचार्य बोले, “कुछ हुआ तो जिम्मेदार होगी सरकार”

Lucknow/Varanasi: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उन्हें मिली कथित जान से मारने की धमकियां। एक खास बातचीत में उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी और साफ कहा कि अगर उन्हें कोई नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उनके इस बयान के बाद धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।

धमकी का दावा और बढ़ती चिंता

अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि उन्हें हाल ही में ऐसी धमकियां मिली हैं, जिनमें उनकी जान को खतरा बताया गया है। उन्होंने दावा किया कि उनके करीबी लोगों ने उन्हें इस बारे में जानकारी दी। धमकी देने वालों ने कथित तौर पर यह भी कहा कि पुलिस भी उनकी सुरक्षा नहीं कर पाएगी।

इस पूरे मामले ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये धमकियां किसने दीं, लेकिन शंकराचार्य ने इसे गंभीर विषय बताते हुए जांच की मांग की है।

सरकार पर जिम्मेदारी का सवाल

अपने बयान में उन्होंने साफ कहा कि अगर उनके साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। उनका मानना है कि एक नागरिक और धार्मिक नेता के तौर पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे इन धमकियों से डरकर अपने काम से पीछे नहीं हटेंगे और अपने विचार खुलकर रखते रहेंगे।

गौ-रक्षा अभियान से जुड़ा विवाद

अविमुक्तेश्वरानंद ने इन धमकियों को अपने गौ-रक्षा अभियानों से जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि कुछ लोग उनके इस अभियान से नाराज हैं और वही लोग उन्हें डराने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह केवल व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि किसी बड़ी सोच या समूह से जुड़ा मामला हो सकता है। हालांकि उन्होंने किसी खास संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन जांच की जरूरत पर जोर दिया।

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डरता हूं तो सिर्फ धर्म और यमराज से’

बातचीत के दौरान उनका एक बयान खास तौर पर चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि वे स्वभाव से डरपोक जरूर हैं, लेकिन उन्हें डर सिर्फ धर्म और यमराज से लगता है, किसी सत्ता से नहीं।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी ताकत भगवान की है और उसी पर उनका भरोसा है। यही वजह है कि वे बिना डरे अपनी बात रखते रहेंगे।

 सरकार और नीतियों पर सवाल

शंकराचार्य ने सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो सही नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर उनके समर्थकों पर दबाव बनाया जा रहा है और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

गंगा और गौ-रक्षा पर भी उठाई आवाज

अविमुक्तेश्वरानंद ने गंगा सफाई के मुद्दे पर भी सरकारों को घेरा। उनका कहना है कि गंगा की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, बल्कि कुछ जगहों पर स्थिति और खराब हुई है।

वहीं गौ-रक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि यह मुद्दा कई दशकों से लंबित है और अब भी इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को भी दोहराया।

‘पीछे नहीं हटूंगा’—संघर्ष जारी रखने का ऐलान

अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि वे अपने अभियानों से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि जब तक उन्हें बोलने की शक्ति मिली है, वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

उन्होंने इस संघर्ष को एक सिद्धांत की लड़ाई बताया और कहा कि यह सिर्फ उनका व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि समाज और धर्म से जुड़ा विषय है।

Written By: Anushri Yadav

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