DAV National Sports 2025-26: राष्ट्रीय पटल पर गूंजा डी.ए.वी. परासी का जयघोष , 76 होनहारों ने पदकों की बौछार कर रचा इतिहास

DAV National Sports 2025-26: डी.ए.वी. नेशनल स्पोर्ट्स 2025-26 के महाकुंभ में विद्यालय के 76 सदस्यीय विशाल दल ने न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।राष्ट्रीय स्तर की इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अदम्य साहस और खेल कौशल का परिचय देते हुए स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों पर कब्जा जमाया।बेटियों ने स्वर्णिम आभा बिखेरी, तो बेटों ने रजत-कांस्य पर जमाया कब्जा
प्रतियोगिता के परिणाम विद्यालय की खेल उत्कृष्टता की गवाही दे रहे हैं,स्वर्ण पदक बालिका वर्ग में वेटलिफ्टिंग अंडर-19 वर्ष में विद्यालय की छात्रा ने स्वर्ण पदक जीतकर विद्यालय का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया।रजत पदक बालक वर्ग ने भी पीछे न रहते हुए कबड्डी अंडर-17 और फुटबॉल अंडर-14 वर्ष जैसे कड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किए।
कांस्य पदक पदकों की इस दौड़ में वेटलिफ्टिंग बालक अंडर-17 व अंडर-19 वर्ष, कबड्डी बालक अंडर-19 वर्ष, एथलेटिक्स 4×100 मीटर रिले बालक और बालिका वर्ग में खो-खो अंडर-14 वर्ष व कबड्डी अंडर-19 में खिलाड़ियों ने कांस्य पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की।

गुरु-शिष्य परंपरा की जीत: “उत्तमोत्तम” प्रशिक्षण का परिणाम
इन पदकों की चमक के पीछे वह पसीना है जो अभ्यास के दौरान बहाया गया। इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय विद्यालय के वरिष्ठ खेल शिक्षक श्री एस.आर. दास और शिक्षिका सुश्री प्रिया सिंह के कुशल नेतृत्व एवं राजेश सिंह और प्रवीण कुमार के सहायक नेतृत्व को जाता है।
इन प्रशिक्षकों के ‘उत्तमोत्तम’ प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और अनथक परिश्रम ने ही कच्चे हीरों को तराशकर राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाया है। मैदान पर इनके द्वारा कड़े अनुशासन और बारीकियों पर दी गई तवज्जो का ही परिणाम है कि आज परासी के बच्चे राष्ट्रीय फलक पर चमक रहे हैं।

भविष्य के लिए विजय-मंत्र: प्राचार्या

इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर विद्यालय की प्राचार्या रचना दुबे ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे विद्यालय के गौरवशाली इतिहास का एक नया अध्याय बताया। विजेता प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा: “हमारे 76 बच्चों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन होना और वहां पदक जीतना, यह सिद्ध करता है कि प्रतिभा संसाधनों की नहीं, बल्कि साधना की मोहताज होती है। इन बच्चों ने कठिन परिश्रम से अपना और विद्यालय का नाम रोशन किया है। मेरी मंगल कामना है कि इनका भविष्य उज्ज्वल हो और आगामी सत्रों की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वे इससे भी बेहतर और ‘सर्वोत्तम’ प्रदर्शन कर विजय पताका फहराएं।”
इस जीत से न केवल विद्यालय परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है और अभिभावकों ने भी विद्यालय प्रबंधन व खेल शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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