
Mamata Banerjee Statement: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संविधान, लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर बड़ा बयान दिया है। जलपाईगुड़ी में हाईकोर्ट सर्किट बेंच के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत से ममता बनर्जी ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रणनीतिकार संगठन I-PAC पर हुई छापेमारी को लेकर राज्य की राजनीति गरमाई हुई है।
“संविधान और लोकतंत्र की रक्षा जरूरी”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि देश की ताकत उसका संविधान और लोकतांत्रिक ढांचा है। उन्होंने कहा—
“लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब संविधान और न्यायपालिका स्वतंत्र रहेंगे। इन्हें बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग पर चिंता
ममता बनर्जी ने बिना किसी एजेंसी का नाम लिए कहा कि जांच एजेंसियों का राजनीतिक दबाव में दुरुपयोग लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में एजेंसियों की कार्रवाई निष्पक्षता के बजाय राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नजर आती है।
मीडिया ट्रायल पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने मीडिया ट्रायल को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है, लेकिन कई बार मीडिया के जरिए पहले ही फैसला सुना दिया जाता है, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
न्यायपालिका से बड़ी अपेक्षा
ममता बनर्जी ने कहा कि आम जनता को न्यायपालिका से बड़ी उम्मीदें होती हैं और ऐसे समय में अदालतों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायपालिका लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाती रहेगी।
राजनीतिक मायने
ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पश्चिम बंगाल में विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि यह अपील केवल राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र और संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर दिया गया संदेश है।



