
International News: दुनिया एक बार फिर परमाणु हथियारों की दौड़ की आशंका के दौर में खड़ी दिखाई दे रही है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि चीन अपने परमाणु हथियारों के जखीरे का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में चीन ने अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम को उम्मीद से कहीं ज्यादा गति दी है, जिससे रणनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
अमेरिकी रक्षा और शस्त्र नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, चीन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयम बरतने के वादों के बावजूद अपने परमाणु हथियारों की संख्या और क्षमता दोनों में इजाफा किया है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि चीन इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) सिस्टम, मिसाइल साइलो और आधुनिक परमाणु डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर तेजी से काम कर रहा है।
क्यों बढ़ी अमेरिका की टेंशन?
अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली ‘न्यू स्टार्ट’ संधि के भविष्य को लेकर पहले ही अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में चीन का बढ़ता परमाणु भंडार वॉशिंगटन के लिए नई रणनीतिक चुनौती बन गया है। अमेरिका का मानना है कि अगर चीन को किसी बहुपक्षीय हथियार नियंत्रण ढांचे में शामिल नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में वैश्विक हथियार संतुलन बिगड़ सकता है।
इसी चिंता के चलते अमेरिका ने रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे परमाणु शक्तियों से चर्चा तेज की है। कोशिश यह है कि एक नया या संशोधित अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार किया जाए, जिसमें चीन की भागीदारी सुनिश्चित हो और परमाणु हथियारों की होड़ को रोका जा सके।
क्या चीन कर रहा है गुप्त परीक्षण?
कुछ अमेरिकी विश्लेषकों ने सेइस्मिक आंकड़ों के आधार पर आशंका जताई है कि चीन ने कम तीव्रता वाले परमाणु परीक्षण किए हो सकते हैं। हालांकि, चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजिंग का कहना है कि वह न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता (minimum deterrence) की नीति पर कायम है और किसी भी तरह की हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं है।
चीन का आधिकारिक रुख यह है कि वह अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप सीमित और संतुलित परमाणु क्षमता बनाए हुए है। चीन यह भी कहता रहा है कि परमाणु हथियारों को कम करने की जिम्मेदारी सबसे पहले उन देशों की है जिनके पास सबसे बड़ा भंडार है।
International News: ईरान में बढ़ते तनाव के बीच भारत अलर्ट, नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह
वैश्विक असर क्या होगा?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका, रूस और चीन के बीच भरोसे का संकट गहराता है, तो वैश्विक सुरक्षा माहौल और अस्थिर हो सकता है। परमाणु हथियारों की होड़ न सिर्फ सैन्य खर्च बढ़ाती है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव को भी जन्म देती है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले से ही अमेरिका और चीन के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा चल रही है, जिसमें ताइवान, दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे मुद्दे शामिल हैं।
यदि परमाणु संतुलन को लेकर स्पष्ट समझौते नहीं हुए, तो आने वाले वर्षों में नई हथियार दौड़ की शुरुआत हो सकती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इस तरह की प्रतिस्पर्धा वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल निगाहें संभावित कूटनीतिक वार्ताओं पर टिकी हैं। अमेरिका बहुपक्षीय वार्ता के जरिए चीन को औपचारिक हथियार नियंत्रण समझौते में लाने की कोशिश कर रहा है। वहीं चीन अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं पर जोर दे रहा है।
आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि क्या बड़ी शक्तियां आपसी अविश्वास को कम कर पाती हैं या दुनिया एक नए परमाणु प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश करने जा रही है
Written By: Anushri yadav



