
Bharat Bandh 2026: देशभर में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने नए श्रम कानूनों और केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। यूनियनों का आरोप है कि साल 2025 में लागू किए गए चार नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और कंपनियों को कर्मचारियों की छंटनी करने की खुली छूट देते हैं। वहीं, कुछ राज्यों के संगठन इस हड़ताल को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसका विरोध भी कर रहे हैं।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, देशव्यापी हड़ताल से बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और जलापूर्ति जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि सभी बैंक यूनियन इसमें शामिल नहीं होंगी, लेकिन AIBEA, AIBOA और BEFI जैसे संगठनों ने विरोध में भाग लेने का ऐलान किया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, राज्य परिवहन सेवाएं, सरकारी कार्यालय और औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।
इस भारत बंद को संयुक्त किसान मोर्चा, कृषि श्रमिक संघों, छात्र और युवा संगठनों का भी समर्थन मिला है। आम आदमी पार्टी ने भी बंद का समर्थन करते हुए इसे मजदूरों और किसानों के अधिकारों की लड़ाई बताया है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को मजदूरों की आवाज सुननी चाहिए। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ संगठनों ने हड़ताल का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक एजेंडा करार दिया है।
कोलकाता समेत कई शहरों में ट्रेड यूनियनों ने नए लेबर कोड और अन्य विधेयकों के खिलाफ रैलियां निकाली हैं। यूनियनों का दावा है कि करीब 30 करोड़ श्रमिक इस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। पिछले साल जुलाई में हुई इसी तरह की हड़ताल में करीब 25 करोड़ कामगारों ने हिस्सा लिया था और 550 से अधिक जिलों में इसका असर देखने को मिला था। ओडिशा और असम में बंद का असर सबसे ज्यादा रहने की संभावना जताई जा रही है, जबकि पंजाब सहित कई राज्यों में भी बड़ी भागीदारी की उम्मीद है।
Written By: Kalpana Pandey



