Crime News: अतीक अहमद की सल्तनत का अंत, प्रशासन ने 100 करोड़ की जमीन मुक्त कराई

अतीक अहमद के साम्राज्य का अंत, 38 बीघा जमीन अब सरकारी नियंत्रण में, गैंग के छह सदस्य सूचीबद्ध

Crime News: प्रयागराज में कभी आतंक और गुंडागर्दी का पर्याय बने कुख्यात माफिया अतीक अहमद का साम्राज्य अब इतिहास बन चुका है। अतीक और उसके भाई अशरफ की मौत को दो साल से अधिक हो गए हैं, लेकिन उनके गिरोह और अवैध गतिविधियों की गूँज अभी भी शहर में महसूस की जाती है। हाल ही में प्रशासन ने अतीक के गैंग द्वारा कब्जाई गई लगभग 38 बीघा जमीन को सरकारी नियंत्रण में लेकर मुक्त कराया, जिसकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

यह जमीन नासिरपुर सिलना गांव में स्थित थी, जहां कभी अतीक का आतंक चलता था। अब इस पर कानून का राज स्थापित किया जा रहा है। प्रशासन ने जमीन पर ईडी कार्यालय, जीएसटी कार्यालय और महिला हॉस्टल बनाने की योजना बनाई है। इसका मतलब साफ है कि वही जमीन जो पहले लोगों को डराने और धमकाने के लिए इस्तेमाल होती थी, अब समाज और जनता के काम आएगी।

सिर्फ जमीन की मुक्ति ही नहीं, प्रशासन ने अतीक अहमद गैंग की सख्ती से कमर तोड़ने की योजना भी लागू की है। एंटी‑लैंड माफिया टास्क फोर्स ने छह नए सहयोगियों की पहचान की है जो अतीक के जाने के बाद भी अवैध कब्जा और अपराध में सक्रिय थे। इनमें मोहम्मद मुस्लिम, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद जीशान, खालिद जफर, जय प्रकाश दुबे और फहीम अहमद शामिल हैं। इन पर हत्या, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। जिला अधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया है कि इन सभी के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी।

इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में उमेश पाल हत्याकांड जैसी दर्दनाक घटनाएं हैं। 24 फरवरी को इस हत्या की दूसरी बरसी थी। उमेश पाल और उनके दो गनर दिनदहाड़े मारे गए थे, और उस दिन पुलिस व्यवस्था की चुनौती सामने आई थी। इस घटना ने यह दिखाया कि अतीक का डर अभी भी जिंदा था। उमेश पाल की हत्या के बाद यूपी पुलिस ने एक्शन मोड में आकर अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर और गिरफ्तारी की रणनीति अपनाई।

Crime News: इटावा में CRPF जवान ने प्रेम प्रसंग के चलते किया छात्र की हत्या, शव ट्रेन ट्रैक पर मिला

27 फरवरी को अरबाज और 6 मार्च को उस्मान जैसे मुख्य आरोपी पुलिस की कार्रवाई में मारे गए। फिर 13 अप्रैल को अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम को यूपी एसटीएफ ने पकड़ा, लेकिन जवाबी फायरिंग में दोनों मारे गए। इन घटनाओं ने दिखा दिया कि अब अतीक का साम्राज्य टूट चुका है।

अतीक और अशरफ की मौत के बाद भी कुछ अपराधी, जैसे शाइस्ता परवीन और गुड्डू मुस्लिम, फरार हैं और पुलिस लगातार उनकी तलाश में है। अतीक की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी गुहार लगाई गई थी, लेकिन उसका डर वास्तविक साबित हुआ।

आज प्रयागराज में 38 बीघा जमीन अब सरकारी कब्जे में है, और इसका उपयोग जनता की भलाई और विकास के कामों में किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चाहे कोई कितना भी ताकतवर क्यों न हो, कानून और बुलडोजर का पहिया हर अपराधी तक पहुंचेगा।

हालांकि अतीक का अंत हो चुका है, लेकिन उसके गैंग के बचे हुए सदस्य और रहस्यमय चिट्ठी की गुत्थी अब भी सवाल खड़े करती है। क्या यूपी से माफिया राज पूरी तरह खत्म हुआ है, या अभी भी उसके अवशेष कहीं छिपे हैं? यह सवाल आज भी प्रशासन और जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

Written By: Anushri Yadav

Show More

Related Articles

Back to top button