Anthropic AI : एंथ्रोपिक एआई पर भारत में केस, नाम को लेकर मचा बड़ा विवाद, 1 करोड़ के हर्जाने की मांग

Anthropic AI पर भारत में नाम को लेकर केस दर्ज, बेंगलुरु की कंपनी ने 1 करोड़ के हर्जाने की मांग की, 16 फरवरी को कोर्ट में सुनवाई।

Anthropic AI : अमेरिकी एआई कंपनी Anthropic AI एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में इसके नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल के लॉन्च ने अमेरिकी शेयर बाजार में भारी हलचल मचा दी थी, जिससे कई दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए। अब इसी कंपनी के खिलाफ भारत में नाम के विवाद को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया है। बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी ने एंथ्रोपिक एआई पर 1 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

नाम को लेकर शुरू हुआ कानूनी बवाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु स्थित Anthropic Software नाम की कंपनी ने जनवरी 2026 में कर्नाटक की एक कॉमर्शियल कोर्ट में अमेरिकी कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कराया है। भारतीय कंपनी का दावा है कि वह वर्ष 2017 से ‘Anthropic’ नाम का उपयोग कर रही है, जबकि हाल ही में अमेरिकी एआई फर्म ने इसी नाम से अपना टूल लॉन्च किया, जिससे ब्रांड को लेकर ग्राहकों में भ्रम पैदा हो रहा है।

लॉन्च के साथ ही हिल गए थे बाजार

Anthropic AI टूल के लॉन्च के बाद NASDAQ में लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई थी। इसका असर सिर्फ अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी TCS, Infosys और HCL Tech जैसे आईटी स्टॉक्स में तेज गिरावट देखने को मिली थी।

आईटी कंपनियों को क्यों लगा झटका?

विशेषज्ञों के मुताबिक, Anthropic का नया एआई टूल कॉर्पोरेट और लीगल वर्कफ्लो को ऑटोमेट करने में सक्षम है। इससे पारंपरिक आईटी और लीगल सर्विस प्रोवाइडर्स के बिजनेस मॉडल पर खतरा मंडराने लगा। यही वजह रही कि LegalZoom के शेयर 20%, Thomson Reuters के 15% और RELX के 14% तक टूट गए।

भारतीय कंपनी ने क्या कहा?

Anthropic Software के फाउंडर और डायरेक्टर मोहम्मद अय्याज मुल्ला ने कहा कि उनका मकसद विवाद नहीं, बल्कि स्पष्टता और ब्रांड अधिकारों की रक्षा है। अमेरिकी कंपनी के नाम से उनके ग्राहकों को लगातार परेशानी हो रही है, इसलिए कानूनी कार्रवाई जरूरी हो गई थी।

कोर्ट ने भेजा नोटिस, 16 फरवरी को सुनवाई

कर्नाटक की अदालत ने 20 जनवरी 2026 को अमेरिकी एआई कंपनी को समन जारी कर दिया था। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 को होगी। माना जा रहा है कि इस केस का असर भारत में एआई कंपनियों के ब्रांड नेम और ट्रेडमार्क नियमों पर भी पड़ सकता है।

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