
Ankita Bhandari Murder Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर न्याय की मांग अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अल्मोड़ा जिले की दो सगी बहनों ने देश के राष्ट्रपति को अपने खून से पत्र लिखकर न सिर्फ न्याय की गुहार लगाई है, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता पर भी तीखा सवाल खड़ा किया है। यह विरोध अब महज एक मांग नहीं, बल्कि टूटते भरोसे और गहरे आक्रोश की प्रतीक बन गया है।
दोनों बहनों ने अपने पत्र में लिखा है कि अंकिता की हत्या सिर्फ एक बेटी की हत्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की अंतरात्मा की हत्या है। उन्होंने राष्ट्रपति से सवाल किया है कि जब एक ऐसी बेटी को, जिसका मामला पूरे देश में गूंजा, अब तक न्याय नहीं मिल सका, तो आम घरों की बेटियां खुद को कैसे सुरक्षित मानें। उनका कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब न्याय की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तो आम नागरिकों के पास ऐसे असहज कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर शुरुआत से ही जांच और कार्रवाई पर सवाल उठते रहे हैं। मामले में वीआईपी दबाव, राजनीतिक संरक्षण और जांच की रफ्तार को लेकर लगातार आरोप लगते रहे हैं। यही वजह है कि समय बीतने के साथ जनता का भरोसा कमजोर होता गया और यह आक्रोश अब प्रतीकात्मक लेकिन बेहद कठोर विरोध के रूप में सामने आया है।
खून से लिखे इस पत्र की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे “न्याय के लिए आख़िरी चीख” बताया है, जबकि सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने इस विरोध को सिस्टम के लिए चेतावनी करार दिया है। लोगों का कहना है कि अगर न्याय व्यवस्था समय रहते सक्रिय होती, तो किसी को इस हद तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
यह मामला एक बार फिर महिला सुरक्षा और न्याय प्रणाली की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अल्मोड़ा की इन दो बहनों का यह कदम बताता है कि जब संवैधानिक रास्तों से उम्मीद टूटने लगती है, तो विरोध असाधारण और चुभने वाला रूप ले लेता है। अब देश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या इस दर्दनाक अपील के बाद सिस्टम जागेगा और अंकिता को वह न्याय मिलेगा, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही है।



