
International News: मध्य पूर्व में बढ़ते तनावपूर्ण हालात के बीच दक्षिणी ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। जर्मनी के भू-विज्ञान अनुसंधान केंद्र (GFZ) के अनुसार यह भूकंप जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिससे इसे उथला भूकंप माना जा रहा है। उथले भूकंप आम तौर पर सतह पर ज्यादा तेज महसूस होते हैं और आबादी वाले इलाकों में घबराहट पैदा कर सकते हैं। स्थानीय निवासियों ने तेज झटकों की पुष्टि की है और कई स्थानों पर लोग घरों से बाहर निकल आए।
भूकंप ऐसे समय पर आया है जब ईरान पहले से ही क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय तनावों के कारण सुर्खियों में है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते टकराव, प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी कूटनीतिक खींचतान ने स्थिति को संवेदनशील बना रखा है। इसी पृष्ठभूमि में आए इस भूकंप ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई तरह की अटकलों को जन्म दिया।
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में इसे संभावित परमाणु परीक्षण से जोड़कर देखा गया। हालांकि अब तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था या भूकंपीय अध्ययन केंद्र ने इस भूकंप को न्यूक्लियर टेस्ट से संबंधित नहीं बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक भूकंप और भूमिगत परमाणु परीक्षण से उत्पन्न कंपन की प्रकृति अलग होती है। भूकंपीय तरंगों के विश्लेषण से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि घटना टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण हुई है या किसी मानव-निर्मित गतिविधि का परिणाम है। फिलहाल उपलब्ध डेटा प्राकृतिक भूकंपीय गतिविधि की ओर ही इशारा कर रहा है।
ईरान भौगोलिक रूप से अत्यंत सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। यह देश अरबियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के संगम क्षेत्र के पास आता है। इन टेक्टोनिक प्लेटों के लगातार दबाव और खिसकने से समय-समय पर ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जो भूकंप के रूप में महसूस किया जाता है। इतिहास में ईरान कई विनाशकारी भूकंप झेल चुका है, जिनमें हजारों लोगों की जान गई है और भारी संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसी कारण यहां आपदा प्रबंधन तंत्र को अपेक्षाकृत सतर्क और सक्रिय रखा जाता है।
इस बार आए 5.5 तीव्रता के भूकंप को मध्यम श्रेणी का माना जा रहा है। इस तीव्रता का भूकंप मजबूत झटके पैदा कर सकता है और कमजोर निर्माण वाली इमारतों को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार कुछ इलाकों में इमारतों में दरारें आने और दीवारों के प्लास्टर गिरने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर तबाही की पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीण और पुराने इलाकों में प्रशासन द्वारा विशेष निगरानी रखी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत एवं बचाव एजेंसियों को सक्रिय कर दिया। अस्पतालों, दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन इकाइयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे टीमों को भेजा गया है ताकि नुकसान का आकलन किया जा सके। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे खुले स्थानों में सतर्क रहें, आफ्टरशॉक्स की संभावना को ध्यान में रखें और अफवाहों पर विश्वास न करें।
Global News: India-US ट्रेड डील $30 ट्रिलियन अमेरिकी मार्केट खुला, टैरिफ घटकर 18%
भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स यानी बाद के हल्के झटके आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार मध्यम तीव्रता के भूकंप के बाद छोटे-छोटे झटके कुछ घंटों या दिनों तक महसूस हो सकते हैं। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना पर नजर रखी जा रही है, खासकर इसलिए क्योंकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक राजनीति का अहम मुद्दा रहा है। हालांकि वैज्ञानिक समुदाय का स्पष्ट मत है कि हर भूकंपीय गतिविधि को सैन्य या परमाणु गतिविधि से जोड़कर देखना उचित नहीं है। भूकंप-निगरानी नेटवर्क दुनिया भर में फैला हुआ है और किसी भी असामान्य विस्फोटक गतिविधि का विश्लेषण अलग तरीके से किया जाता है।
फिलहाल उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों और आधिकारिक बयानों के आधार पर यह घटना प्राकृतिक भूकंपीय प्रक्रिया का परिणाम मानी जा रही है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और विस्तृत तकनीकी विश्लेषण के बाद अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।
Written By: Anushri Yadav



