Amazon News: कोवेंट्री स्थित अमेज़न वेयरहाउस में टीबी के मामले, कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल

Amazon News: ब्रिटेन के कोवेंट्री शहर में स्थित अमेज़न के फुलफिलमेंट सेंटर में तपेदिक यानी टीबी के कई मामले सामने आने के बाद वहां काम करने वाले कर्मचारियों और ट्रेड यूनियनों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। इस वेयरहाउस में करीब 3,000 लोग कार्यरत हैं और हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां टीबी के 10 मामले पाए गए हैं।

अमेज़न कंपनी ने पुष्टि की है कि ये सभी मामले “नॉन-कंटेजियस” यानी संक्रामक नहीं हैं। हालांकि, इसके बावजूद कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी का कहना है कि वह नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) और यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) के साथ मिलकर जांच और स्क्रीनिंग प्रोग्राम चला रही है।

अमेज़न के प्रवक्ता के अनुसार, जिन कर्मचारियों पर असर पड़ने की आशंका है, उन्हें पहले ही सूचित कर दिया गया है और किसी भी नए मामले की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद वेयरहाउस का संचालन सामान्य रूप से जारी है।

वहीं दूसरी ओर, GMB यूनियन ने अमेज़न के फैसले पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। यूनियन का कहना है कि जब तक सभी सुरक्षा उपायों की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती, तब तक वेयरहाउस को अस्थायी रूप से बंद किया जाना चाहिए और कर्मचारियों को पूरे वेतन के साथ घर भेजा जाना चाहिए।

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कोवेंट्री साउथ से सांसद ज़राह सुल्ताना ने भी इस मामले में अमेज़न की आलोचना की है। उन्होंने कंपनी पर कर्मचारियों की सेहत को हल्के में लेने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे हालात में वेयरहाउस खुला रखना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, टीबी पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज बेहद ज़रूरी होता है। इसके लक्षणों में लंबे समय तक खांसी, थकान, बुखार, वजन घटना और भूख कम लगना शामिल हैं।

यूके में हाल के वर्षों में टीबी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। साल 2024 में टीबी के मामलों में करीब 13.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है।

अमेज़न का कहना है कि वह सभी सरकारी दिशानिर्देशों का पालन कर रहा है और कर्मचारियों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। लेकिन यूनियन और राजनीतिक प्रतिनिधियों की मांग है कि सिर्फ दावे नहीं, ठोस कदम उठाए जाएं।

 कुल मिलाकर, यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ा नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा और कॉरपोरेट जिम्मेदारी का बड़ा सवाल बन गया है।

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