
UP News : प्रयागराज में Allahabad High Court ने एक एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के साथ सम्मानसूचक शब्द न लिखे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस से पूछा कि जब मामला एक केंद्रीय मंत्री से जुड़ा था, तो उनके नाम के आगे ‘माननीय’ या ‘श्रीमान’ जैसे शब्दों का प्रयोग क्यों नहीं किया गया।
यह टिप्पणी जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मथुरा में दर्ज 2025 के एक मामले की सुनवाई के दौरान की। यह मामला आपराधिक धमकी और विश्वासघात से जुड़ी एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर आधारित है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भले ही मूल शिकायत में मंत्री का उल्लेख उचित ढंग से न किया गया हो, लेकिन ‘चेक एफआईआर’ तैयार करते समय पुलिस का दायित्व था कि वह प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सम्मानसूचक शब्द का इस्तेमाल करे, भले ही वह ब्रैकेट में ही क्यों न हो।
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया है कि वे हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करें कि एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के साथ ‘माननीय’ या ‘श्री’ शब्द क्यों नहीं जोड़ा गया।
इसके अलावा, अदालत ने मामले में शामिल फॉर्च्यूनर कार (UP52-BD-7799) के वास्तविक मालिक की जानकारी भी मांगी है। सरकारी वकील को अगली सुनवाई में इसका विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नौकरी दिलाने के नाम पर उससे करीब 80 लाख रुपये लिए गए और बाद में पैसे वापस नहीं किए गए, साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई।
इस मामले में केंद्रीय मंत्री का नाम एफआईआर में दर्ज है, हालांकि उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है। अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।



