Tec News: AI की नई क्रांति! GPT-5 की खोज से सस्ती होंगी दवाइयां, खेती और मेडिकल टेस्ट

Tec News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ चैटिंग या फोटो बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विज्ञान और मेडिकल रिसर्च की दुनिया में भी बड़ा बदलाव ला रहा है। हाल ही में GPT-5 नाम के एडवांस AI सिस्टम से जुड़ी एक नई खोज सामने आई है, जिसने प्रोटीन बनाने की महंगी प्रक्रिया को काफी हद तक सस्ता करने का रास्ता दिखाया है। इस खोज का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है, क्योंकि प्रोटीन का इस्तेमाल इंसुलिन, कैंसर की दवाओं, कोविड जैसे रोगों के टेस्ट, मेडिकल जांच किट, खेती में इस्तेमाल होने वाले एंजाइम और कई इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स में होता है।

अब तक वैज्ञानिकों को प्रोटीन बनाने के लिए जीवित कोशिकाओं को तैयार करना पड़ता था, जिसमें काफी समय और पैसा लगता था। लेकिन नई CFPS यानी सेल-फ्री प्रोटीन सिंथेसिस तकनीक की मदद से यह प्रक्रिया ज्यादा तेज और किफायती बन गई है। बताया जा रहा है कि इस नई तकनीक से प्रोटीन बनाने की लागत करीब 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है, जबकि इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है। GPT-5 ने रिसर्च डेटा और प्रयोगों का विश्लेषण कर वैज्ञानिकों को बेहतर समाधान खोजने में मदद की।

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इसका सबसे बड़ा फायदा हेल्थ सेक्टर में देखने को मिल सकता है। अगर प्रोटीन सस्ते बनेंगे तो इंसुलिन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं भी सस्ती हो सकती हैं, जिससे ज्यादा लोगों को इलाज मिल पाएगा। इसके अलावा मेडिकल टेस्ट और डायग्नोस्टिक किट्स की लागत कम होने से छोटे शहरों और गांवों तक सस्ती जांच सुविधाएं पहुंचने की उम्मीद है।

खेती और उद्योग के क्षेत्र में भी इसका असर दिख सकता है। कई कंपनियां केमिकल्स की जगह एंजाइम का इस्तेमाल करती हैं, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। अगर ये एंजाइम सस्ते बनेंगे, तो प्रदूषण कम करने वाली तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मदद से रिसर्च की रफ्तार भी तेज होगी, क्योंकि वैज्ञानिक कम खर्च में ज्यादा प्रयोग कर सकेंगे।

कुल मिलाकर, यह खोज सिर्फ टेक्नोलॉजी की उपलब्धि नहीं बल्कि आम आदमी की जेब, सेहत और भविष्य से जुड़ा बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

Written By: Kalpana Pandey

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