Crime News Lucknow: प्रेमिका को गोली मारने के मामले में अभियुक्त आकाश कुमार को जमानत

Crime News Lucknow: राजधानी लखनऊ में प्रेमिका को गोली मारने के सनसनीखेज मामले में आरोपी आकाश कुमार को सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है। न्यायालय ने अपने आदेश में पीड़िता को लगी गोली के स्थान और परिस्थितियों को महत्वपूर्ण आधार मानते हुए जमानत याचिका स्वीकार की।

यह मामला 12 दिसंबर 2025 का है, जब एक युवक द्वारा अपनी प्रेमिका को गोली मारने की घटना सामने आई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी आकाश कुमार के खिलाफ जानलेवा हमले (हत्या के प्रयास) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था।

घटना ने उस समय शहर में काफी हलचल मचा दी थी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू की और साक्ष्य एकत्र किए। पीड़िता को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसका इलाज चला।

सत्र न्यायालय में सुनवाई

मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय में हुई। 21 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार किया।

न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि पीड़िता को लगी गोली शरीर के गैर-जीवनोपयोगी (नॉन-वाइटल) अंग पर लगी थी। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि आरोपी की मंशा हत्या करने की होती, तो वह एक से अधिक राउंड फायर कर सकता था।

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया परिस्थितियां जमानत के पक्ष में हैं। इसी आधार पर आरोपी आकाश कुमार की जमानत याचिका स्वीकार कर ली गई।

बचाव पक्ष का पक्ष

अभियुक्त की ओर से जमानत याचिका अधिवक्ता मोहम्मद हातिम बेग द्वारा प्रस्तुत की गई थी। सुनवाई के बाद अधिवक्ता मोहम्मद हातिम बेग ने कहा कि न्यायालय ने मेडिकल तथ्यों और केस की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष निर्णय दिया है।

उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से यह माना कि चोट गैर-जीवनोपयोगी अंग पर थी और मामले की परिस्थितियां जमानत के अनुकूल थीं।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

हालांकि आरोपी को जमानत मिल गई है, लेकिन मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए जाएंगे। अदालत अंतिम सुनवाई के बाद ही आरोपी की दोषसिद्धि या निर्दोषता पर निर्णय देगी।

फिलहाल, इस मामले में जमानत आदेश के बाद एक बार फिर शहर में चर्चा तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जमानत मिलना अंतिम फैसला नहीं होता, बल्कि यह केवल मुकदमे के दौरान अस्थायी राहत होती है।

रिपोर्ट: निखिल श्रीवास्तव

लोकेशन: लखनऊ

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