
National News: पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह कर्मचारियों को बकाया DA का कम से कम 25 फीसदी हिस्सा जारी करे। कोर्ट ने साफ कहा कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है और इसे आर्थिक तंगी का हवाला देकर रोका नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि DA सिर्फ अतिरिक्त लाभ नहीं बल्कि कर्मचारियों को महंगाई से राहत देने का जरूरी साधन है। इसलिए राज्य सरकार की वित्तीय कठिनाइयों को भुगतान रोकने का आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने 2008 से 2019 के बीच लंबित महंगाई भत्ते के भुगतान को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं, जिससे लाखों कर्मचारियों को सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है।
6 मार्च तक 25% भुगतान का निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि बकाया DA का 25 फीसदी हिस्सा तय समयसीमा के भीतर कर्मचारियों को दिया जाए। साथ ही बाकी रकम के भुगतान के लिए चरणबद्ध योजना तैयार करने की बात भी कही गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी इस विवाद के दौरान रिटायर हो चुके हैं, वे भी इस फैसले के लाभ के पात्र होंगे।
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निगरानी के लिए बनाई गई विशेष कमेटी
फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता एक पूर्व शीर्ष अदालत की न्यायाधीश करेंगी। समिति में पूर्व हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इस कमेटी को कुल बकाया राशि का आकलन करने, भुगतान का शेड्यूल तय करने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह समिति को हर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराए और तय समय पर स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करे। पहली किस्त जारी होने के बाद कोर्ट मामले की समीक्षा करेगा।
कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत
महंगाई भत्ता लंबे समय से पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ था। कई कर्मचारी संगठनों का कहना था कि केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में राज्य में DA कम है और लंबे समय से बकाया भुगतान नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें लंबित राशि मिलने की उम्मीद जगी है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य सरकार किस तरह इस आदेश का पालन करती है और बाकी 75 फीसदी बकाया राशि का भुगतान किस चरण में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि दूसरे राज्यों में भी DA से जुड़े मामलों पर असर डाल सकता है।
फिलहाल, अदालत के इस निर्देश के बाद कर्मचारियों को राहत की उम्मीद है, जबकि राज्य सरकार के सामने वित्तीय प्रबंधन की नई चुनौती खड़ी हो गई है। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और भुगतान की प्रक्रिया से ही साफ होगा कि इस ऐतिहासिक फैसले का जमीनी असर कितना बड़ा होगा।
Written By : Anushri yadav



