
Sports News: Bangladesh Cricket Board (BCB) के टी20 वर्ल्ड कप 2026 से हटने के फैसले ने बांग्लादेश क्रिकेट में गहरी हलचल पैदा कर दी है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने के निर्णय के बाद अब टीम के भीतर की निराशा खुलकर सामने आ रही है। सीनियर असिस्टेंट कोच Mohammad Salahuddin ने खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक टूर्नामेंट से बाहर होना नहीं, बल्कि “27 साल का सपना टूटना” है।
सुरक्षा विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के कुछ मुकाबले भारत में प्रस्तावित थे। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए मैचों को किसी तटस्थ स्थल पर कराने की मांग की। बोर्ड का कहना था कि खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने शेड्यूल में बदलाव की मांग स्वीकार नहीं की। इसके बाद हालात ऐसे बने कि बांग्लादेश ने टूर्नामेंट में भाग नहीं लेने का फैसला किया, और उनकी जगह दूसरी टीम को मौका दे दिया गया।
यह निर्णय सिर्फ प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर ड्रेसिंग रूम तक पहुंचा। कई खिलाड़ियों के लिए यह विश्व कप करियर का सबसे बड़ा अवसर था। कुछ सीनियर खिलाड़ी ऐसे थे जिनके लिए यह शायद आखिरी टी20 विश्व कप होता।
‘कोमा जैसी स्थिति में चले गए खिलाड़ी’
कोच मोहम्मद सलाहुद्दीन ने भावुक बयान देते हुए कहा कि खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया देखकर उनका दिल टूट गया। उनके मुताबिक, कुछ खिलाड़ी मानसिक रूप से इतने आहत हुए कि वे “कोमा जैसी स्थिति” में चले गए थे — यानी पूरी तरह से टूट चुके थे, बात करने की हालत में नहीं थे। उन्हें दोबारा ट्रेनिंग और मैच मोड में लाना कोचिंग स्टाफ के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
सलाहुद्दीन ने कहा, “जब कोई खिलाड़ी बचपन से विश्व कप खेलने का सपना देखता है और अचानक वह मौका छिन जाता है, तो उसे संभालना आसान नहीं होता।” उन्होंने यह भी माना कि इस फैसले ने टीम के आत्मविश्वास और मनोबल को गहरी चोट पहुंचाई है।
आसिफ नजरुल पर सीधा हमला
इस पूरे विवाद के बीच सलाहुद्दीन ने पूर्व सलाहकार Asif Nazrul पर भी तीखी टिप्पणी की। उनका आरोप है कि फैसले को लेकर पहले कहा गया कि यह सरकार का निर्णय है, लेकिन बाद में बयान बदलकर जिम्मेदारी खिलाड़ियों और बोर्ड पर डाल दी गई। कोच के मुताबिक, ऐसे विरोधाभासी बयानों से भ्रम की स्थिति बनी और टीम के भीतर असंतोष बढ़ा।
सलाहुद्दीन ने कहा कि खिलाड़ियों के सामने सच्चाई साफ-साफ रखनी चाहिए थी। “जब ऊपर से अलग-अलग संदेश आते हैं, तो ड्रेसिंग रूम में भरोसा कमजोर होता है,” उन्होंने संकेत दिया। उनका मानना है कि पारदर्शिता की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
खिलाड़ियों के करियर पर असर
टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच से दूर रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ा झटका होता है। कई युवा खिलाड़ियों के लिए यह खुद को वैश्विक स्तर पर साबित करने का मौका था, जबकि सीनियर खिलाड़ियों के लिए यह अनुभव और उपलब्धि जोड़ने का अवसर। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर आने वाले महीनों में टीम के प्रदर्शन पर भी दिख सकता है।
हालांकि, BCB अब घरेलू टूर्नामेंट और आगामी अंतरराष्ट्रीय सीरीज के जरिए खिलाड़ियों का मनोबल लौटाने की कोशिश कर रहा है। टीम मैनेजमेंट का फोकस अब मानसिक मजबूती और एकजुटता पर है।
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आगे की राह
बांग्लादेश क्रिकेट के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है—टूटे हुए विश्वास और निराशा को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करना। कोचिंग स्टाफ का कहना है कि टीम को फिर से तैयार किया जाएगा और भविष्य के टूर्नामेंट्स पर फोकस किया जाएगा। लेकिन यह साफ है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होना बांग्लादेश क्रिकेट इतिहास का एक ऐसा अध्याय बन गया है, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या खेल और राजनीति के टकराव का खामियाजा अंततः खिलाड़ियों को ही भुगतना पड़ता है? फिलहाल, बांग्लादेशी ड्रेसिंग रूम में दर्द, निराशा और नई शुरुआत की कोशिश—तीनों साथ-साथ चल रहे हैं।
Written By: Anushri Yadav



