
UP News : उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए ‘कम लागत–अधिक उत्पादन’ मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य अन्नदाताओं को आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हुए उन्हें प्रदेश की समृद्धि में भागीदार बनाना है। बजट में कृषि योजनाओं के लिए बढ़े प्रावधान और ग्रामीण ढांचे में निवेश से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
94,188 हेक्टेयर में खेती, सोलर पंप से घटा खर्च
वाराणसी में 94,188 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है और 3 लाख से अधिक किसान कृषि से जुड़े हैं। 2026-27 के बजट में कृषि योजनाओं के लिए करीब ₹10,888 करोड़ का प्रस्ताव किया गया है। सोलर पंप योजना, किसान पाठशाला और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों की लागत घटी है और उत्पादन बढ़ा है। प्राकृतिक खेती, निर्बाध बिजली आपूर्ति और पशुधन विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
‘खेत तालाब योजना’ से लाखों की कमाई
कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र में खेत तालाब योजना किसानों के लिए आय का नया स्रोत बनी है। तालाब निर्माण के बाद मछली पालन अपनाने वाले किसानों की आय 8–9 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक पहुंच गई है। इससे पारंपरिक खेती के मुकाबले कई गुना अधिक लाभ मिल रहा है और ग्रामीण रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
90% सब्सिडी से स्वीट कॉर्न में रिकॉर्ड लाभ
गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक में त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत बीज पर 90% अनुदान मिला। एफपीओ के माध्यम से किसानों ने स्वीट कॉर्न की खेती कर प्रति एकड़ 1 से 1.25 लाख रुपये तक की आय अर्जित की। कम लागत और बेहतर बाजार व्यवस्था से किसानों की आय दोगुनी हुई है।
कृषि क्षेत्र में बढ़ता निवेश
सरकार ने एफपीओ के लिए 75 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड और ग्राम्य विकास के लिए ₹25,500 करोड़ का प्रावधान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नवाचार, सब्सिडी और बेहतर बाजार संपर्क से यूपी का कृषि मॉडल तेजी से सशक्त हो रहा है।



