
भारत-अमेरिका एकजुट: अरब सागर में तेल तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत ने पहली बार खुले तौर पर अमेरिका के साथ कदम मिलाया है। भारतीय तटरक्षक बल ने मुंबई तट से लगभग 100 मील उत्तर-पश्चिम में तीन प्रतिबंधित तेल टैंकरों को पकड़ा, जिन पर आरोप है कि वे समुद्र में जहाज से जहाज तेल ट्रांसफर कर रहे थे। यह तरीका अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए अक्सर इस्तेमाल किया जाता है। इन जहाजों को बाद में मुंबई लाया गया, जहां चालक दल से पूछताछ जारी है।
पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में नई गर्माहट का संकेत है। हाल के महीनों में व्यापार और टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच तनातनी रही थी, लेकिन इस कार्रवाई को रणनीतिक सहयोग के नए दौर के रूप में देखा जा रहा है।
मामला तथाकथित “डार्क फ्लीट” से जुड़ा है। जहाजों पर नजर रखने वाली वैश्विक एजेंसियों के अनुसार ईरान, रूस और वेनेजुएला जैसे प्रतिबंधित देशों से तेल ढोने वाले करीब 1300 जहाजों का एक नेटवर्क सक्रिय है। ये जहाज फर्जी झंडों, बदले हुए नामों और ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके अपनी पहचान छिपाते हैं। समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित कर प्रतिबंधों को दरकिनार किया जाता है। विशेषज्ञ इन्हें पर्यावरण के लिए भी खतरा मानते हैं, क्योंकि अधिकतर जहाज पुराने और सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते।
ब्रिटेन की एक समुद्री विश्लेषण कंपनी के मुताबिक पकड़े गए जहाजों में अल जाफजिआ, द अस्फाल्ट स्टार और स्टेलर रूबी शामिल हो सकते हैं, जिन पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध हैं। हालांकि ईरान से जुड़ी फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि इन जहाजों का ईरान की सरकारी तेल कंपनी से कोई संबंध नहीं है।
भारत पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरान से तेल आयात रोक चुका है। ऐसे में यह कार्रवाई वैश्विक भू-राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के समीकरण में एक अहम संकेत मानी जा रही है।
Written By: Kalpana Pandey



