
Supreme Court of India ने एक अहम फैसले में हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी के खिलाफ रेप की कोशिश (Attempt to Rape) का मामला खारिज कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई व्यक्ति महिला के पायजामे का नाड़ा खींचता है और उसके साथ जबरदस्ती करने की नीयत साबित होती है, तो इसे रेप की कोशिश के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे मामलों में ‘इरादा’ (Intent) और ‘परिस्थितियां’ बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल यह कहकर कि दुष्कर्म की पूरी घटना नहीं हुई, आरोपी को गंभीर आरोपों से राहत नहीं दी जा सकती।
शीर्ष अदालत ने संबंधित हाईकोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की व्याख्या से कानून की भावना कमजोर होती है और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का गलत संदेश जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायालयों को संवेदनशील मामलों में तथ्यों और परिस्थितियों का व्यापक मूल्यांकन करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए बहाल करते हुए निर्देश दिया कि आरोपों पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाए। इस फैसले को महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय स्पष्ट करता है कि किसी भी प्रकार की जबरन यौन मंशा से की गई हरकत को हल्के में नहीं लिया जा सकता और अदालतें ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाने को बाध्य हैं।



