
International News: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत को एक अहम रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा है कि चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए मजबूत और आत्मनिर्भर भारत जरूरी है। अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री पॉल कपूर ने यह बयान अमेरिकी संसद की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की दक्षिण और मध्य एशिया संबंधी सब-कमेटी के समक्ष सुनवाई के दौरान दिया।
कपूर ने कहा कि एक ऐसा भारत, जो स्वतंत्र रूप से आर्थिक और सैन्य विकास कर सके, अमेरिका के रणनीतिक हितों को मजबूत करता है। उनके मुताबिक, भारत की बढ़ती क्षमता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का आर्थिक विस्तार और सैन्य आधुनिकीकरण क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने में मददगार है।
रूस से तेल खरीद को लेकर भी अमेरिकी अधिकारी ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत धीरे-धीरे तेल आयात के स्रोतों में विविधता ला रहा है और भविष्य में अमेरिकी ऊर्जा निर्यात के लिए भी संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
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हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को भी क्षेत्र में एक जरूरी साझेदार बताया। कपूर ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ ऊर्जा, कृषि और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आतंकवाद विरोधी सहयोग के जरिए पाकिस्तान को आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद मिल रही है।
सुनवाई के दौरान अमेरिकी सांसदों ने दक्षिण एशिया में आतंकवाद और चरमपंथ को लेकर भी सवाल उठाए। इस पर कपूर ने कहा कि अमेरिका में संगठित रूप से ऐसे नेटवर्क सक्रिय होने के ठोस सबूत नहीं हैं, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं, डेमोक्रेटिक सांसद सिडनी कैमलेजर-डोव ने पिछले साल भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश और सीजफायर का श्रेय लेने की कोशिश से अमेरिकी कूटनीति को नुकसान हुआ।
Written By: Kalpana Pandey



