
Assam Election Update: असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले चुनाव आयोग ने राज्य की फाइनल मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार ड्राफ्ट लिस्ट की तुलना में 2.43 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, लेकिन इसी बीच कुछ मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कुल कितने मतदाता हैं?
चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम सूची के मुताबिक राज्य में अब कुल लगभग 2.49 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है, जबकि तीसरे लिंग के मतदाताओं की भी संख्या दर्ज की गई है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची दिसंबर 2025 में प्रकाशित की गई थी, जिसमें कुल मतदाता संख्या इससे अधिक थी। विशेष पुनरीक्षण (Special Summary Revision) प्रक्रिया के बाद करीब ढाई लाख नाम सूची से हटा दिए गए।
क्यों हटाए गए 2.43 लाख नाम?
चुनाव अधिकारियों के अनुसार हटाए गए नामों में वे लोग शामिल हैं जो:
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डुप्लीकेट पाए गए,
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स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके थे,
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या जिनका सत्यापन पूरा नहीं हो सका।
मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है ताकि केवल पात्र नागरिक ही मतदान कर सकें।
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मुस्लिम बहुल जिलों में क्यों बढ़े वोटर?
कुल संख्या में कमी के बावजूद कुछ मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। विशेष रूप से निचले और मध्य असम के कुछ क्षेत्रों में नए नाम जुड़ने और युवा मतदाताओं के पंजीकरण के कारण वृद्धि दर्ज की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन जिलों में जनसंख्या वृद्धि और 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं की संख्या अधिक रही है, जिससे वोटर बेस में विस्तार हुआ है।
यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों के समीकरण को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इन इलाकों में मतदाता संख्या का सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ता है।
नए मतदाताओं की एंट्री
विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में नए मतदाताओं को भी सूची में शामिल किया गया है। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाखों नए युवाओं ने पहली बार अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराया है।
इससे साफ है कि जहां एक ओर अवैध या डुप्लीकेट नाम हटाए गए, वहीं दूसरी ओर नए पात्र नागरिकों को जोड़ा भी गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
फाइनल सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ दलों ने मतदाता सूची को साफ करने की प्रक्रिया का स्वागत किया है, तो वहीं कुछ ने मुस्लिम बहुल जिलों में बढ़ी संख्या को लेकर सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले ही अवैध घुसपैठ और मतदाता सूची की शुद्धता को बड़ा मुद्दा बना चुके हैं। ऐसे में यह फाइनल लिस्ट चुनावी बहस का अहम विषय बन सकती है।
मतदाताओं के लिए जरूरी सूचना
चुनाव आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपना नाम वोटर लिस्ट में अवश्य जांच लें। इसके लिए वोटर हेल्पलाइन ऐप, आधिकारिक वेबसाइट या बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क किया जा सकता है।
अगर किसी का नाम गलती से हट गया है या जानकारी में त्रुटि है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है।
क्या कहता है यह आंकड़ा?
कुल मिलाकर असम की फाइनल मतदाता सूची ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर को नया आयाम दिया है। एक ओर जहां 2.43 लाख नाम हटाए गए, वहीं कुछ इलाकों में मतदाता संख्या में वृद्धि ने चुनावी रणनीतियों को प्रभावित किया है।
अब सबकी नजर आगामी विधानसभा चुनाव और इन आंकड़ों के वास्तविक राजनीतिक असर पर टिकी है।
Written By: Anushri Yadav



