State News: पंजाब में नशा विरोधी मुहिम पर सियासी संग्राम, ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ को लेकर भी टकराव तेज

AAP ने राज्यपाल की नशा विरोधी यात्रा को बताया दिखावा, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सेहत योजना पर दुष्प्रचार के खिलाफ जनता से किया सतर्क रहने का आह्वान

State News: पंजाब में नशा विरोधी मुहिम और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने राज्यपाल की नशा विरोधी यात्रा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन नेताओं पर नशा तस्करों को राजनीतिक संरक्षण देने के आरोप हैं, उनके साथ मंच साझा कर कोई भी अभियान जनता का भरोसा नहीं जीत सकता। उन्होंने इसे महज दिखावा करार देते हुए कहा कि जब तक नशा तस्करी के कथित सियासी सरपरस्तों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक किसी भी नशा विरोधी मुहिम को जनसमर्थन मिलना असंभव है।

धालीवाल ने आरोप लगाया कि जिन दलों के शासनकाल में पंजाब में नशा अपने चरम पर पहुंचा, आज वही दल खुद को नशे के खिलाफ लड़ाई का अगुवा बताने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है। उनका कहना था कि सरकार को चाहिए कि वह दिखावटी अभियानों की जगह जमीनी स्तर पर कार्रवाई करे, ताकि नशा तस्करी की जड़ पर सीधा प्रहार किया जा सके।

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इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक वीडियो संदेश के जरिए ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ को लेकर फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पंजाबवासियों से अपील की कि वे इस जनकल्याणकारी योजना के बारे में फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों से गुमराह न हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ पंजाब विरोधी ताकतें नहीं चाहतीं कि राज्य के आम नागरिकों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसी कारण वे इस योजना को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ की शुरुआत इसलिए की है ताकि पंजाब के हर नागरिक, विशेष रूप से गरीब, मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवारों को बिना किसी आर्थिक बोझ के बेहतर इलाज मिल सके। इस योजना के तहत पंजाब का हर परिवार 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज करवा सकता है। उन्होंने इसे देश की अपनी तरह की पहली और ऐतिहासिक पहल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भर्ती से लेकर जांच, ऑपरेशन, दवाइयों और अस्पताल से छुट्टी तक की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह कैशलेस होगी। लाभार्थियों को इलाज के दौरान किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं करना होगा, क्योंकि अस्पतालों को सरकार द्वारा तय दरों पर सीधे भुगतान किया जाएगा।

भगवंत मान ने यह भी बताया कि सरकार ने इस योजना के तहत लगभग 2,600 बीमारियों और इलाज सेवाओं के लिए दरें निर्धारित की हैं। इसके साथ ही अधिक से अधिक निजी अस्पतालों को योजना में शामिल किया गया है, ताकि लोगों को अपने नजदीकी अस्पताल में ही बेहतर इलाज मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूचीबद्ध सभी अस्पताल सरकार द्वारा तय नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।

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रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के सभी नागरिक जिनमें सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और आम लोग शामिल हैं इस योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड बनवा सकते हैं। यह कार्ड सुविधा केंद्रों, कॉमन सर्विस सेंटरों या ऑनलाइन माध्यम से आधार कार्ड या वोटर कार्ड का उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों से पैसे की मांग करता है तो तुरंत सरकार को इसकी शिकायत की जाए। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त, दंडात्मक और उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी पारदर्शिता के साथ जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से न केवल आम लोगों का इलाज का खर्च कम होगा, बल्कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार आएगा। उन्होंने इसे पंजाब के स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम बताया।

पंजाब में एक तरफ नशा तस्करी को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं, तो दूसरी ओर सरकार की सेहत योजना को लेकर जनता में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। अब देखना यह होगा कि यह योजना जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या वाकई यह पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदल पाएगी।

Written By : Anushri Yadav

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