
National News: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता जा रहा है। इस मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और पब्लिशर पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। राहुल गांधी का कहना है कि या तो जनरल नरवणे सच नहीं बोल रहे हैं या फिर किताब का पब्लिशर पेंगुइन झूठ बोल रहा है, क्योंकि किताब साल 2023 से ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon पर उपलब्ध रही है।
दरअसल, यह पूरा विवाद तब सामने आया जब जनरल नरवणे की किताब के कथित प्रसार को लेकर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की। इसके बाद सरकार की ओर से यह दावा किया गया कि किताब अभी आधिकारिक तौर पर बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है। इसी दावे पर राहुल गांधी ने तीखा पलटवार किया है और इसे तथ्यों के विपरीत बताया है।
राहुल गांधी ने कहा कि जनरल नरवणे की किताब साल 2023 में प्रकाशित हुई थी और उसी समय इसे Amazon पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पब्लिशर पेंगुइन यह कहकर गुमराह कर रहा है कि किताब बाजार में नहीं आई थी। राहुल गांधी ने इस दावे के समर्थन में सोशल मीडिया का हवाला देते हुए कहा कि खुद जनरल नरवणे और पेंगुइन पब्लिशन ने उस वक्त ट्वीट कर लोगों को किताब खरीदने के लिए लिंक साझा किया था।
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राहुल गांधी ने एक पुराने ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि जनरल नरवणे ने खुद लिखा था— “मेरी किताब अब Amazon पर उपलब्ध है, खरीदने के लिए लिंक पर क्लिक करें।” ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर किताब उपलब्ध ही नहीं थी, तो उसे खरीदने का लिंक क्यों दिया गया? राहुल गांधी के मुताबिक, इस पूरे मामले में साफ तौर पर विरोधाभास है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि इस विवाद को सिर्फ कानूनी या तकनीकी मामला बनाकर पेश करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सच्चाई सामने आने के बाद भी सरकार और संबंधित संस्थाएं जवाब देने से बच रही हैं। राहुल गांधी का कहना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
इस बीच, दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि जब किताब पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में थी और बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थी, तो उसके कथित “प्रसार” को लेकर FIR दर्ज करने का क्या औचित्य है। उन्होंने इशारों में कहा कि यह कार्रवाई चयनात्मक और राजनीतिक दबाव में की गई लगती है।
विवाद बढ़ने के साथ ही पेंगुइन पब्लिशन और जनरल नरवणे की ओर से सफाई भी सामने आई है, लेकिन राहुल गांधी का कहना है कि बयान और जमीनी हकीकत में फर्क साफ दिख रहा है। उनके मुताबिक, सोशल मीडिया पर मौजूद पुराने ट्वीट्स और Amazon लिस्टिंग इस बात का सबूत हैं कि किताब पहले से उपलब्ध थी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक किताब तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए सरकार, विपक्ष और संस्थानों के बीच टकराव और गहराता नजर आ रहा है। एक तरफ सरकार कानून और प्रक्रिया की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़कर देख रहा है।
फिलहाल, जनरल नरवणे की किताब को लेकर शुरू हुआ यह विवाद थमता नहीं दिख रहा। राहुल गांधी के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा और तेज हो गया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और कानूनी बहस और बढ़ने की संभावना है।
Written By : Anushri Yadav



