Global News: ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे…’ BRICS को लेकर भारत के समर्थन में रूस, पाकिस्तान पर भी दिया सख्त संदेश

India-Russia Relations: BRICS समिट में भारत के एजेंडे के साथ खड़ा रूस, आतंकवाद और पाकिस्तान के मुद्दे पर दिखी एकजुटता

Global News: भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बन गई है। बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात, अमेरिका के बढ़ते दबाव और यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने साफ कर दिया है कि भारत के साथ उसका रिश्ता किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होगा। BRICS को लेकर रूस के ताजा बयान ने यह साबित कर दिया है कि नई वैश्विक व्यवस्था में भारत रूस का भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बना हुआ है।

दरअसल, रूस ने BRICS समिट में भारत की भूमिका और एजेंडे का खुलकर समर्थन किया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से जारी बयान में कहा कि BRICS के चेयरमैन के रूप में रूस, भारत के नेतृत्व और उसके एजेंडे के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। बयान में यह भी कहा गया कि भारत द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे न सिर्फ समय की जरूरत हैं, बल्कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान भी पेश करते हैं।

रूस ने स्पष्ट रूप से माना है कि मौजूदा दौर में आतंकवाद और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में भारत का एजेंडा “रिलिवेंट और लॉजिकल” है। BRICS समिट में भारत जिन मुद्दों को प्राथमिकता देगा, वे वैश्विक स्थिरता और विकास की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। रूस का कहना है कि इन मुद्दों पर भारत के साथ उसका सहयोग सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी जारी रहेगा।

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इस बयान का राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि एक तरफ अमेरिका लगातार भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने या बंद करने का दबाव बना रहा है। अमेरिका का आरोप है कि रूस से तेल खरीदकर भारत जो भुगतान करता है, उसका इस्तेमाल रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करता है। इसी वजह से अमेरिका नहीं चाहता कि भारत-रूस के बीच तेल व्यापार जारी रहे।

हालांकि, हाल ही में अमेरिका ने भारत के साथ करीब 500 मिलियन डॉलर का व्यापार समझौता किया है और रूस से तेल व्यापार के कारण लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाया है। इसके बावजूद रूस का यह साफ संदेश है कि अगर भारत तेल खरीद कम भी करता है, तब भी दोनों देशों की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

रूस के बयान में पाकिस्तान को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए गए हैं। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि पाकिस्तान पर लंबे समय से आतंकवाद और आतंकियों को पनाह देने के आरोप लगते रहे हैं। भारत आतंकवाद के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है और पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह अभियान और तेज हुआ है। ऐसे में BRICS समिट में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुख रहेगा और इस एजेंडे पर रूस भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।

रूस ने यह भी याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर भी भारत और रूस मिलकर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। वैश्विक आतंकवाद विरोधी एजेंडे पर दोनों देशों का रुख काफी हद तक समान रहा है। BRICS के मंच से भी इस मुद्दे को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का यह बयान सिर्फ भारत के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और पश्चिमी देशों को भी एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत को दबाव में लाकर रूस से अलग नहीं किया जा सकता। भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता देता है और रूस इसे पूरी तरह समझता और सम्मान करता है।

कुल मिलाकर, BRICS को लेकर रूस का यह बयान भारत-रूस संबंधों की गहराई को एक बार फिर उजागर करता है। चाहे ऊर्जा सुरक्षा हो, आतंकवाद का मुद्दा हो या बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग—रूस ने साफ कर दिया है कि भारत के साथ उसकी दोस्ती ‘जय-वीरू’ की तरह अटूट है। अंतरराष्ट्रीय दबाव, व्यापारिक सौदे या भू-राजनीतिक तनाव, इनमें से कोई भी भारत और रूस के रिश्तों को कमजोर नहीं कर सकता।

Written By : Anushri Yadav

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