Mahashivratri 2026 :  महाशिवरात्रि पर काशी–मथुरा सनातन समन्वय का भव्य आयोजनए, विश्वनाथ–लड्डू गोपाल के मध्य हरि-हर भाव का सजीव दर्शन

Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि 2026 पर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास और श्री कृष्ण जन्मस्थली के बीच विशेष धार्मिक आयोजन। हरि-हर समन्वय का सजीव प्रतीक बना काशी-मथुरा सांस्कृतिक नवाचार।

Mahashivratri 2026 :  महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी और मथुरा के मध्य सनातन सांस्कृतिक समन्वय की ऐतिहासिक परंपरा को सशक्त करते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा एक विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन सनातन परंपरा में निहित हरि-हर के शाश्वत संबंध का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया।

इस अवसर पर मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थली मंदिर न्यास से पधारे सम्मानित प्रतिनिधियों ने भगवान श्री विश्वेश्वर के लिए लाए गए पावन उपहार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास को विधिवत सौंपे। डमरू, शंख और मंत्रोच्चार की दिव्य ध्वनि के बीच महाशिवरात्रि पर्व पर इन उपहारों को श्रद्धापूर्वक भगवान विश्वेश्वर महादेव को अर्पित किए जाने हेतु स्वीकार किया गया।

इसके पश्चात श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से भगवान श्री विश्वेश्वर को अवलोकित कराए गए विशेष उपहार मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थली के लिए भेंट स्वरूप प्रदान किए गए। इस धार्मिक आदान-प्रदान को विधिपूर्वक और समारोहपूर्वक संपन्न किया गया।

मथुरा से पधारे लड्डू गोपाल के आदरणीय प्रतिनिधियों को भगवान श्री विश्वेश्वर की ओर से दक्षिणा एवं प्रसाद भेंट करते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा सादर प्रणाम अर्पित किया गया तथा सम्मानपूर्वक विदा किया गया।

यह नवाचार काशी और मथुरा के मध्य धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता को और अधिक सुदृढ़ करता है। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, समरसता और सनातन संस्कृति की अनुपम अनुभूति प्राप्त हुई। यह पहल न केवल धार्मिक समन्वय का उदाहरण है, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को भी सजीव रूप में प्रस्तुत करती है।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस पावन अवसर पर श्री कृष्ण जन्मस्थली मंदिर न्यास के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए समस्त शिवभक्तों और कृष्णभक्त सनातन श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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