
Youth Mental Health : देश में बदलती सामाजिक संरचना, एकल परिवारों की बढ़ती संख्या, तेज शहरीकरण और प्रतिस्पर्धात्मक जीवनशैली का सीधा असर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता दिख रहा है। राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘टेली मानस’ हेल्पलाइन के हालिया आंकड़ों ने इस समस्या की गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश का हर चौथा युवा उदासी और नींद न आने (अनिद्रा) की समस्या से जूझ रहा है, जबकि हर पांचवां व्यक्ति तनाव और चिंता से परेशान है।
एक साल में साढ़े तीन लाख से ज्यादा कॉल, सबसे ज्यादा युवा वर्ग
राष्ट्रीय स्तर पर किए गए विश्लेषण के अनुसार, बीते एक वर्ष में टेली मानस हेल्पलाइन पर 3,51,454 से अधिक कॉल प्राप्त हुए। इनमें 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही। आंकड़ों के मुताबिक, 14 प्रतिशत कॉल करने वालों ने अनिद्रा, जबकि 14 प्रतिशत ने उदासी या मन भारी रहने की शिकायत की। इसके अलावा 11 प्रतिशत मामलों में तनाव और 9 प्रतिशत में एंग्जायटी की समस्या सामने आई।
आत्महत्या से जुड़े मामले तीन प्रतिशत से भी कम
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आत्महत्या से जुड़े मामले कुल कॉल्स का तीन प्रतिशत से भी कम रहे, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, मानसिक समस्याओं के साथ-साथ लोगों ने घरेलू विवाद, पारिवारिक झगड़े, पढ़ाई और नौकरी से जुड़ी परेशानियों को लेकर भी हेल्पलाइन से मदद मांगी।
हेल्पलाइन पर फोन करने वालों में 56 फीसदी पुरुष
आंकड़ों के अनुसार, टेली मानस हेल्पलाइन पर फोन करने वालों में 56.15 प्रतिशत पुरुष रहे, जबकि शेष कॉल महिलाएं द्वारा की गईं। आयु वर्ग के लिहाज से देखें तो 18 से 45 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी 71.5 प्रतिशत रही, जिससे साफ है कि कामकाजी और युवा वर्ग सबसे अधिक मानसिक दबाव का सामना कर रहा है।
अधिकतर कॉल स्वयं की समस्या के लिए
रिपोर्ट बताती है कि 70.75 प्रतिशत लोगों ने अपनी स्वयं की मानसिक समस्याओं के लिए सलाह ली, जबकि 18.4 प्रतिशत कॉल देखभालकर्ताओं द्वारा की गईं, जिन्होंने किसी परिजन या परिचित के लिए मदद मांगी। कुल कॉल्स में से 93 प्रतिशत नियमित, 3.49 प्रतिशत आपातकालीन और 2.2 प्रतिशत शरारती या असंगत पाई गईं।
2022 में शुरू हुई थी टेली मानस सेवा
गौरतलब है कि टेली मानस सेवा की शुरुआत अक्टूबर 2022 में की गई थी। वर्तमान में यह सेवा 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध है। अब तक 32.84 लाख से अधिक कॉल्स पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में स्थापित 51 टेली मानस सेल में से 47 पूरी तरह कार्यशील हैं। यहां नागरिकों को 20 भारतीय भाषाओं में मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य परामर्श दिया जा रहा है। जल्द ही लक्षद्वीप और पुडुचेरी में भी यह सेवा शुरू की जाएगी।



