Health Update:छोटे बच्चों में डिप्रेशन को कैसे पहचानें?

व्यवहार और आदतों में दिखते हैं मानसिक पीड़ा के संकेत, माता-पिता इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Health Update: आज के समय में डिप्रेशन या मानसिक तनाव को अक्सर बड़ों की समस्या माना जाता है, लेकिन यह सच्चाई का सिर्फ एक हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां छोटे बच्चों को भी प्रभावित कर सकती हैं, खासकर किशोरावस्था के आसपास। समस्या यह है कि बच्चों में डिप्रेशन हमेशा वैसा नहीं दिखता जैसा बड़ों में दिखाई देता है। इसी वजह से कई बार माता-पिता इसे सामान्य व्यवहार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

डिप्रेशन केवल उदासी नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक स्थिति है जो बच्चे के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को बदल देती है। अगर समय रहते इसके संकेत पहचान लिए जाएं, तो सही मदद से बच्चे को इस स्थिति से बाहर निकाला जा सकता है।

बच्चों में डिप्रेशन अलग तरीके से दिखता है

छोटे बच्चों के पास अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने की पूरी क्षमता नहीं होती। इसलिए वे अपने अंदर की मानसिक पीड़ा को व्यवहार और आदतों में बदलाव के जरिए दिखाते हैं। यही वजह है कि बच्चों में डिप्रेशन को अक्सर जिद, बदतमीजी या आलस समझ लिया जाता है।

यह भी पढ़े|Health Update: लिवर की बीमारी कैसे शुरू होती है? जानिए फैटी लिवर, सिरोसिस और लिवर कैंसर के कारण, लक्षण और रिकवरी का पूरा सच

प्रेशन के आम संकेत

व्यवहार में बदलाव
अगर बच्चा अचानक बहुत चिड़चिड़ा रहने लगे, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगे या बार-बार रोने लगे, तो यह मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है। पहले जो बच्चा मिलनसार था, अगर वह लोगों से दूरी बनाने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

रुचियों में कमी
खेलकूद, दोस्तों के साथ समय बिताना या पसंदीदा गतिविधियों में अचानक रुचि खत्म होना भी चिंता की बात हो सकती है। अगर बच्चा उन चीजों से भी खुश नहीं होता जो पहले उसे खुशी देती थीं, तो यह डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है।

अत्यधिक थकान या सुस्ती
बिना किसी शारीरिक कारण के हर समय थका-थका रहना, ऊर्जा की कमी महसूस करना या बहुत ज्यादा सोना या बहुत कम सोना भी मानसिक परेशानी की ओर इशारा करता है।

पढ़ाई में गिरावट
ध्यान न लगना, स्कूल जाने से कतराना या अचानक पढ़ाई में गिरावट आना भी बच्चों में मानसिक दबाव का संकेत हो सकता है।

आत्मविश्वास की कमी
अगर बच्चा खुद को बार-बार बेकार कहने लगे, खुद को दोषी ठहराए या अपनी क्षमता पर शक करने लगे, तो यह एक गंभीर संकेत है।

माता-पिता की भूमिका क्यों है सबसे अहम?

बच्चों में डिप्रेशन को पहचानने में माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। अगर बच्चे के व्यवहार में लंबे समय तक बदलाव नजर आएं, तो उसे “मूड” या “उम्र का असर” कहकर टालना नुकसानदायक हो सकता है।

बच्चे से खुलकर बात करना, उसे सुना जाना और उसकी भावनाओं को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है। जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना भी कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

समय पर मदद है सबसे बड़ा इलाज

डिप्रेशन एक ऐसी समस्या है जो समय के साथ खुद ठीक नहीं होती। सही समय पर पहचान और सहयोग से बच्चे को मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।

Written By: Anushri Yadav

Show More

Related Articles

Back to top button