Kolkata News: क्या फिर ममता की राह में नहीं आएंगे राहुल गांधी? बंगाल चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा दांव

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के ‘बंगाल प्लान’ ने बढ़ाई सियासी हलचल, TMC से दूरी और अकेले चुनाव लड़ने के संकेत

Kolkata News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का भले ही अभी औपचारिक ऐलान न हुआ हो, लेकिन राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है। खास तौर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रिश्तों को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या राहुल गांधी इस बार भी ममता बनर्जी की सियासी राह में नहीं आएंगे, या फिर कांग्रेस ने बंगाल के लिए कोई अलग और बड़ा प्लान तैयार कर लिया है?

गठबंधन से दूरी, अकेले चुनाव की तैयारी

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की हालिया बैठकों से जो संकेत सामने आए हैं, उनसे साफ होता है कि पार्टी पश्चिम बंगाल में इस बार अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस 2026 के विधानसभा चुनाव में सभी 294 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का मन बना चुकी है। इसका मतलब साफ है न TMC के साथ गठबंधन और न ही वाम दलों पर निर्भरता।

राहुल गांधी की सोच क्या कहती है?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मानना है कि बंगाल में पार्टी को लंबे समय से “जूनियर पार्टनर” की भूमिका में रखा गया। TMC के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद कांग्रेस को न तो राजनीतिक स्पेस मिला और न ही संगठन को मज़बूती। ऐसे में राहुल गांधी पार्टी को बंगाल में स्वतंत्र पहचान के साथ खड़ा करना चाहते हैं, भले ही इसका शुरुआती असर सीटों के लिहाज़ से सीमित ही क्यों न हो।

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ममता बनर्जी का रुख पहले से साफ

वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी बार-बार यह साफ कर चुकी हैं कि पश्चिम बंगाल में TMC किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उनका तर्क है कि कांग्रेस राज्य में कमजोर है और चुनावी लड़ाई TMC बनाम BJP की ही रहेगी। ऐसे में कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले से ममता बनर्जी के राजनीतिक गणित पर असर पड़ सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक अब भी मौजूद है।

INDIA गठबंधन पर क्या पड़ेगा असर?

राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और TMC दोनों ही INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन बंगाल में यह आपसी दूरी गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य स्तर पर अलग-अलग रणनीति अपनाने से BJP को अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है, क्योंकि विपक्षी वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ेगी।

🔹कांग्रेस का ‘बंगाल प्लान’ क्या है?

🔹कांग्रेस की रणनीति फिलहाल तीन बिंदुओं पर टिकी दिखती है

🔹संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करना,

🔹युवा और नए चेहरों को आगे लाना,

TMC और BJP दोनों से अलग एक वैकल्पिक राजनीति पेश करना।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि भले ही तत्काल सत्ता मिलना मुश्किल हो, लेकिन लंबे समय में यह रणनीति कांग्रेस को बंगाल में दोबारा खड़ा कर सकती है।

सियासी तस्वीर होगी और दिलचस्प

अगर कांग्रेस अपने फैसले पर कायम रहती है, तो पश्चिम बंगाल का चुनावी मुकाबला तीन-तरफा हो जाएगा TMC, BJP और कांग्रेस। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी वाकई ममता बनर्जी की राह में सियासी चुनौती बनेंगे, या फिर यह लड़ाई कांग्रेस के लिए सिर्फ भविष्य की जमीन तैयार करने का प्रयास साबित होगी।

written By: Anushri yadav

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