
नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने प्रयागराज में गंगा नदी पर कथित अवैध पुल निर्माण के मामले में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) को कड़ी फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि नियमों के उल्लंघन के लिए किसी एक अधिकारी को ही जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है, बल्कि निर्माण से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच, जिसमें चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर ए. सेंथिल वेल शामिल थे, भारतीय किसान यूनियन (पुरवा) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रयागराज में दारागंज और झूंसी के बीच रेलवे पुल का निर्माण गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र में एनएमसीजी की पूर्व अनुमति के बिना किया गया, जो गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 का उल्लंघन है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान जरूरी
एनजीटी ने 30 जनवरी के आदेश में कहा कि 2016 के आदेश का उल्लंघन करते हुए पुल निर्माण का निर्णय लेने और उसे आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। ट्रिब्यूनल ने कहा कि एनएमसीजी के जवाब से यह स्पष्ट होता है कि वह केवल रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने का इरादा रखता है, जबकि यह पर्याप्त नहीं है।
एनजीटी ने यह भी कहा कि जिला स्तरीय समिति के प्रमुख की जिम्मेदारी थी कि उनके जिले में 2016 के आदेश का उल्लंघन न हो। हालांकि, एनएमसीजी ने ऐसे किसी अधिकारी की पहचान या उससे जुड़े किसी संचार रिकॉर्ड को अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया है।
अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट देने के निर्देश
ट्रिब्यूनल ने एनएमसीजी और संबंधित प्रतिवादियों से कहा है कि वे सभी जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर की गई कार्रवाई पर 23 अप्रैल की सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुल निर्माण के दौरान निकलने वाला मलबा गंगा नदी में फेंका गया, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा। एनजीटी ने पाया कि उपलब्ध रिपोर्ट से स्पष्ट है कि एनएमसीजी की कार्रवाई सीमित दायरे में ही रही है।



