
Jhansi: CGST झांसी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को 70 लाख रुपये की रिश्वत मामले में बड़ा झटका लगा है। सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन) ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने इसे गंभीर भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए कहा कि आरोपी की प्रभावशाली स्थिति को देखते हुए साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सीबीआई द्वारा अदालत में पेश रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान प्रभा भंडारी का रवैया सहयोगात्मक नहीं रहा। उन्होंने शुरुआती दौर में अपनी आवाज का नमूना देने से इनकार किया और फेस आईडी व बायोमीट्रिक लॉक वाले मोबाइल को अनलॉक कराने में भी टालमटोल की। जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने रिकॉर्डिंग के लिए दिए गए शब्दों को पढ़ने से भी मना कर दिया, जिससे डिजिटल साक्ष्य जुटाने में बाधा आई।
जांच में कंट्रोल कॉल रिकॉर्डिंग भी अहम साक्ष्य के रूप में सामने आई है। सीबीआई के मुताबिक, अधीक्षक अजय शर्मा और प्रभा भंडारी के बीच हुई बातचीत में बरामद 70 लाख रुपये रिश्वत के होने और उससे सोना खरीदने की बात का जिक्र सामने आया। इसी आधार पर अदालत ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि सीबीआई ने 31 दिसंबर को झांसी से प्रभा भंडारी के अलावा अधीक्षक अजय शर्मा, अनिल तिवारी, बिचौलिए नरेश गुप्ता और राजू मंगतानी समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। सभी पर 70 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सीबीआई अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
Written By: Kalpana Pandey



