
International News: स्विट्जरलैंड के दावोस में हाल ही में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दुनिया की पुरानी वैश्विक व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अब टूट रही है और इसे बनाए रखने के लिए मध्यम ताकत वाले देशों को साथ मिलकर काम करना होगा।
कार्नी ने अपने भाषण में सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया न ही उन्होंने ट्रम्प प्रशासन की नीतियों या अमेरिका के टैरिफ का जिक्र किया, जिनकी वजह से पुराने वैश्विक सिस्टम में अस्थिरता आई। हालांकि उनके संकेत विश्लेषकों के अनुसार भारत की तरफ थे। उन्होंने साफ किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में संतुलन बनाए रखने के लिए मध्यम ताकतों की भूमिका अहम हो गई है।
वास्तव में, भारत इस वक्त दो बड़े दबावों के बीच खड़ा है। एक तरफ अमेरिका की बदलती नीतियां और व्यापारिक रणनीतियां हैं, तो दूसरी ओर चीन की बढ़ती आक्रामकता देश के लिए चुनौती बन गई है। ऐसे समय में भारत अब पारंपरिक साझेदारों से आगे बढ़कर दुनिया के अन्य हिस्सों में नए मित्र और साझेदार तलाशने में जुटा है।
Also Read: Antimicrobial Resistance News, AMR का बढ़ता खतरा, 2050 तक 4 करोड़ मौतों की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यम शक्तियों के साथ सहयोग बढ़ाने का कदम भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे न केवल आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे, बल्कि सुरक्षा और कूटनीतिक मामलों में भी भारत अपनी भूमिका मजबूत कर सकेगा।
कार्नी का संदेश स्पष्ट है पुरानी वैश्विक व्यवस्था अब भरोसेमंद नहीं रही, और भारत जैसी मध्यम शक्तियों को नई साझेदारी और सहयोग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में संतुलन बनाने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
Written By: Kalpana Pandey



