
Antimicrobial Resistance News: मेडिकल साइंस ने बीते कुछ दशकों में कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्होंने गंभीर और कभी लाइलाज मानी जाने वाली बीमारियों का इलाज संभव बना दिया। एंटीबायोटिक्स जैसी एंटीमाइक्रोबियल दवाओं ने लाखों लोगों की जान बचाई और संक्रमण से लड़ने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन अब यही दवाएं धीरे-धीरे बेअसर होती जा रही हैं, जिसे चिकित्सा जगत में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीव दवाओं के खिलाफ खुद को मजबूत बना रहे हैं, जिससे सामान्य इलाज भी मुश्किल होता जा रहा है।
हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल लांसेट में प्रकाशित एक स्टडी ने चिंता और बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार, अगर एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल पर नियंत्रण नहीं किया गया तो साल 2050 तक एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के कारण दुनिया भर में 4 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है। यह आंकड़ा स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
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डॉक्टरों का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स लेना, पशुपालन में इन दवाओं का अत्यधिक उपयोग AMR को तेजी से बढ़ा रहा है। इससे भविष्य में छोटी-सी सर्जरी या सामान्य संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल केवल जरूरत और डॉक्टर की सलाह पर ही करें। साथ ही, सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को जागरूकता अभियान तेज करने और नई दवाओं के शोध पर निवेश बढ़ाने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय में इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट को रोका जा सके।
Written By: Kalpana Pandey



