COCOMI Protest : ‘मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं’, इंफाल में COCOMI की विशाल रैली

COCOMI Protest : इंफाल में COCOMI द्वारा आयोजित विशाल रैली में हजारों लोगों ने मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता से समझौते को खारिज किया। केंद्र से चुनी हुई सरकार की बहाली और राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही की मांग की गई।

COCOMI Protest : मणिपुर की राजधानी इंफाल में शनिवार को हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर एक विशाल रैली निकाली और स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। इस रैली में केंद्र सरकार से मणिपुर में शीघ्र चुनी हुई सरकार की बहाली की मांग की गई, साथ ही चेतावनी दी गई कि अनदेखी की स्थिति में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

यह रैली कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) के आह्वान पर आयोजित की गई, जो कई मेइतेई नागरिक समाज संगठनों की एक छत्र संस्था है।

5 किलोमीटर लंबा मार्च, टिडिम ग्राउंड से शहर के केंद्र तक

यह मार्च इंफाल के टिडिम ग्राउंड से शुरू होकर ख्वैरामबंद इमा कीथेल होते हुए शहर के हृदय स्थल तक लगभग 5 किलोमीटर तक चला। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मणिपुर के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।

यह प्रदर्शन राज्य में राष्ट्रपति शासन की पहली वर्षगांठ से कुछ सप्ताह पहले हुआ है। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था।

भारत सरकार की नीति के खिलाफ जनाक्रोश

पूर्व COCOMI संयोजक खुराइजाम अथौबा ने कहा कि विस्थापित लोगों समेत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि मणिपुर के लोग मौजूदा संकट को लेकर भारत सरकार की नीति से बेहद असंतुष्ट और आक्रोशित हैं।

उन्होंने कहा, “अब लोग समझ चुके हैं कि यह कोई प्राकृतिक जातीय संघर्ष नहीं है। सरकार ने इरेन्ग नागा गांव, तोरबुंग, सैतों न्गानुकॉन जैसे क्षेत्रों में बार-बार हुए हमलों और हालिया हत्याओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जो उसकी विफलता को दर्शाता है।”

‘प्रॉक्सी वॉर’ का आरोप, नीति बदलने की मांग

अथौबा ने आरोप लगाया कि मणिपुर में एक तरह का प्रॉक्सी वॉर चल रहा है और अब यह बर्दाश्त से बाहर हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस रैली के जरिए जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत सरकार को मणिपुर को लेकर अपनी नीति और रवैये में बदलाव करना होगा।

आठ सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा

रैली के बाद प्रदर्शनकारियों ने आठ-सूत्री मांगों की सूची पेश की, जिसमें कुकी उग्रवादी समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को वापस लेना, समझौते के नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई, मणिपुर की क्षेत्रीय व प्रशासनिक अखंडता का पूर्ण सम्मान शामिल है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब कुकी समुदाय के कुछ संगठन अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

मई 2023 से जारी है मणिपुर संकट

गौरतलब है कि मणिपुर में जातीय हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को हुई थी, जब मेइतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल करने के अदालत के आदेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। हिंसा राज्यभर में फैल गई, जिसमें अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।

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