Sunetra Pawar: सामाजिक काम से सत्ता के शिखर तक, महाराष्ट्र की राजनीति में नया अध्याय

Sunetra Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता सुनेत्रा पवार को राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी है। यह फैसला सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि सत्ता, परिवार और राजनीति के समीकरणों में आए बड़े बदलाव का संकेत है।

सुनेत्रा पवार का जन्म 1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) में हुआ था। उनका परिवार पहले से ही राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पिता बजराव पाटिल और भाई पद्मसिंह पाटिल जिले की राजनीति के बड़े नाम रहे हैं। 1985 में उनकी शादी अजीत पवार से हुई और तभी से वे महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का हिस्सा बन गईं, लेकिन उन्होंने लंबे समय तक खुद को सक्रिय राजनीति से दूर ही रखा।

शादी के बाद सुनेत्रा ने राजनीति से ज्यादा समाजसेवा पर ध्यान दिया। बारामती और उसके आसपास के गांवों में उन्होंने सफाई, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को अपना मिशन बनाया। कटेवाड़ी गांव में उन्होंने खुले में शौच के खिलाफ अभियान चलाया, घर घर शौचालय बनवाए और लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक किया। उनके प्रयासों से गांव को ‘निर्मल ग्राम’ का दर्जा मिला और वह एक मॉडल इको विलेज के रूप में पहचान बना सका।

सुनेत्रा ने सिर्फ सामाजिक काम ही नहीं किया, बल्कि रोजगार के क्षेत्र में भी योगदान दिया। बारामती हाईटेक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना में उनकी बड़ी भूमिका रही, जहां आज हजारों महिलाएं काम कर रही हैं। इससे साफ होता है कि उनका फोकस सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ा विकास रहा है।

राजनीति में उनकी एंट्री 2024 के लोकसभा चुनाव से हुई, जब उन्हें बारामती से उम्मीदवार बनाया गया। वहां उनका मुकाबला अपनी ही ननद सुप्रिया सुले से हुआ। भले ही वे चुनाव हार गईं, लेकिन इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया, जहां उन्होंने संसद में सक्रिय भागीदारी निभाई।

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अब जब वे उपमुख्यमंत्री बनने जा रही हैं, तो उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पार्टी के अंदर कई सीनियर नेता हैं, जिनके साथ संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। साथ ही पवार परिवार की अंदरूनी राजनीति और एनसीपी के दो गुटों की खींचतान भी उनकी राह मुश्किल बना सकती है।

सुनेत्रा पवार की छवि एक शांत, संयमी और काम पर भरोसा करने वाली नेता की रही है। अब देखना होगा कि क्या वे सत्ता की इस बड़ी जिम्मेदारी को उसी संतुलन और समझदारी से निभा पाती हैं, जैसे उन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में किया।

कुल मिलाकर सुनेत्रा पवार का यह सफर महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। अगर वे अपने अनुभव, संवेदनशीलता और विकास की सोच को सरकार में उतार पाती हैं, तो यह न सिर्फ उनके लिए, बल्कि राज्य की राजनीति के लिए भी ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

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