
Sonbhadra News-अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) की जमीन पर कथित कब्जे के मामले में अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट आबिद शमीम की अदालत ने रामपुर बरकोनिया थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज करने और मामले की विवेचना सीओ (क्षेत्राधिकारी) से कराकर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपने का निर्देश दिया है।
यह आदेश विफनी देवी पत्नी स्व. हीरा एवं रामविलास गोड़ पुत्र स्व. जनकलाल गोड़, निवासी बिरनचुआ, थाना रामपुर बरकोनिया द्वारा दाखिल याचिका पर पारित हुआ।
आरोप क्या हैं?
याचिका के अनुसार
23 नवंबर 2025 को सुबह 9–10 बजे कुछ लोग ट्रैक्टर लेकर आए और अनुसूचित जनजाति की जमीन जोतकर फसल बोने लगे। विरोध करने पर कथित रूप से
- जातिसूचक शब्दों से गाली
- जान से मारने की धमकी
दी गई।
आरोपियों में कुछ नामजद व्यक्तियों के साथ 4–5 अज्ञात लोगों का भी उल्लेख है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि कई लोगों ने घटना देखी, लेकिन डर की वजह से गवाही नहीं दे पाए।
पुलिस पर भी सवाल
याचिकाकर्ताओं के अनुसार
- थाने में सूचना देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई
- 10 दिसंबर 2025 को एसपी को रजिस्टर्ड डाक से सूचना दी गई
फिर भी सुनवाई न होने पर अदालत की शरण लेनी पड़ी।
पीड़ित परिवार ने कहा कि जीवन-निर्वहन का एकमात्र सहारा वही जमीन है।
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने मामले को गंभीर अपराध मानते हुए एफआईआर दर्ज कर विवेचना कराना आवश्यक माना और पुलिस को स्पष्ट आदेश दिया।
ये सिर्फ जमीन का विवाद नहीं ये आदिवासियों के अधिकार, सम्मान और कानून के राज की परीक्षा है।
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