
Ajit Pawar death : महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार, 28 जनवरी 2026 की सुबह एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आई, जब उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा Learjet 45 विमान बारामती हवाई अड्डे पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत हो गई। इस त्रासदी ने न केवल पवार परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है, बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और महाराष्ट्र की राजनीति के भविष्य पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
अजित पवार की मौत ऐसे समय हुई है, जब NCP के दो गुट एक अजित पवार के नेतृत्व में और दूसरा शरद पवार व सुप्रिया सुले के नेतृत्व में सुलह और संभावित विलय की दिशा में बढ़ते दिख रहे थे। हाल के नगर निगम चुनावों के दौरान दोनों खेमों के बीच तालमेल के संकेत मिले थे, जिससे यह अटकलें तेज हो गई थीं कि जल्द ही पार्टी फिर से एक हो सकती है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों ने संयुक्त घोषणापत्र जारी किया और अजित पवार के ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह के तहत प्रचार किया। अजित पवार और सुप्रिया सुले की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह संदेश गया था कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता एकता चाहते हैं। खुद अजित पवार ने भी “जोड़ने की राजनीति” की बात कहकर सुलह के संकेत दिए थे।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अजित पवार पवार परिवार के सबसे कुशल रणनीतिकार माने जाते थे। छह बार उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार ने 2023 में NCP को विभाजित कर BJP-शिवसेना महायुति सरकार में शामिल होकर पार्टी की दिशा बदल दी थी। उनकी अचानक मौत से पवार परिवार के भीतर नेतृत्व संकट और राजनीतिक असंतुलन पैदा हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि महायुति सरकार में अजित पवार गुट के 40 से अधिक विधायकों का नेतृत्व कौन करेगा और क्या शरद पवार गुट के साथ संभावित सुलह की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी या पूरी तरह रुक जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अजित पवार की गैरमौजूदगी से NCP की एकता की योजना को बड़ा झटका लग सकता है और महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।



