
Swami Avimukteshwaranand: प्रयागराज माघ मेले से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आज अपना अनशन समाप्त कर दिया और माघ मेले से विदा लेने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बिना स्नान किए ही प्रयागराज से लौट रहे हैं।
अनशन समाप्त करने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भावुक और तीखा बयान देते हुए कहा—
“बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे हैं। न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। आज हम यहां से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कुछ प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं।”
क्या है पूरा मामला
माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कुछ गंभीर मुद्दों को लेकर अनशन शुरू किया था। उनका कहना था कि सनातन परंपराओं, संतों के सम्मान और न्याय से जुड़े विषयों पर उनकी बात को गंभीरता से नहीं सुना गया। इसी के विरोध स्वरूप उन्होंने अनशन का रास्ता चुना।
हालांकि, कई दिन बीत जाने के बाद भी जब उन्हें संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला, तो उन्होंने अनशन समाप्त करते हुए प्रयागराज छोड़ने का फैसला किया।
‘बिना स्नान’ का संदेश
सनातन परंपरा में माघ मेले के दौरान संगम स्नान का विशेष धार्मिक महत्व होता है। ऐसे में बिना स्नान लौटना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक विरोध माना जा रहा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह कदम यह संकेत देता है कि वे व्यवस्था और शासन से संतुष्ट नहीं हैं।
संत समाज में चर्चा
उनके इस निर्णय के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं में गहरी चर्चा है। कई लोग इसे सनातन धर्म और संतों के सम्मान से जुड़ा गंभीर प्रश्न मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे शासन-प्रशासन के लिए चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज माघ मेले से बिना स्नान लौटना केवल एक घटना नहीं, बल्कि न्याय, सत्य और सनातन परंपराओं से जुड़ा एक बड़ा संदेश है। उनके शब्दों में छोड़े गए “प्रश्न” आने वाले समय में धार्मिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन सकते हैं।



