
Republic Day History India : भारत के पहले गणतंत्र दिवस से ठीक दो दिन पहले संविधान सभा की ऐतिहासिक अंतिम बैठक हुई थी। इसी बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को निर्विरोध भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया। इस मौके पर उन्होंने न सिर्फ राष्ट्रगान और वंदे मातरम को लेकर अहम घोषणा की, बल्कि महाभारत की एक कथा का उल्लेख कर आत्मप्रशंसा से दूरी बनाने का संदेश भी दिया।
राष्ट्रगान और वंदे मातरम पर ऐतिहासिक घोषणा
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा को संबोधित करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान होगा। वहीं ‘वंदे मातरम’ को स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी ऐतिहासिक भूमिका के कारण राष्ट्रगान के बराबर सम्मान दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर सरकार राष्ट्रगान की धुन या शब्दों में आवश्यक परिवर्तन कर सकती है।
राष्ट्रपति पद पर निर्विरोध चुनाव
संविधान सभा के सचिव एच.वी.आर. अयंगर ने सदन को सूचित किया कि राष्ट्रपति पद के लिए केवल डॉ. राजेंद्र प्रसाद का ही नामांकन प्राप्त हुआ है। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उनका प्रस्ताव रखा और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने समर्थन किया। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से भारत का पहला राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित किया गया।
नेहरू और पटेल ने की सराहना
प्रधानमंत्री नेहरू ने अपने भाषण में कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में संविधान सभा ने तीन वर्षों के कठिन दौर में भी संविधान निर्माण का ऐतिहासिक कार्य पूरा किया।
सरदार पटेल ने भी उनके समर्पण, धैर्य और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्हें भारत गणराज्य के पहले राष्ट्रपति बनने पर बधाई दी।
महाभारत का उदाहरण: आत्मप्रशंसा से परहेज का संदेश
अपनी प्रशंसा से असहज होते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने महाभारत की एक प्रसिद्ध कथा का उदाहरण दिया। उन्होंने अर्जुन और श्रीकृष्ण से जुड़ी कहानी सुनाते हुए कहा कि अपनी तारीफ सुनना आत्मदाह के समान है।
उन्होंने बताया कि अर्जुन की प्रतिज्ञा और श्रीकृष्ण द्वारा सुझाए गए समाधान के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि आत्मप्रशंसा से बचना चाहिए। डॉ. प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वे अपने कार्यकाल के अंत में अपने कार्यों के आधार पर मूल्यांकन चाहते हैं, न कि नियुक्ति के समय प्रशंसा।
संविधान पर हस्ताक्षर और संसद का गठन
इस बैठक में सभी सदस्यों ने संविधान की अंग्रेजी और हिंदी प्रतियों पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही संविधान सभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया, जो आगे चलकर भारत की संसद के रूप में कार्य करने लगी।
26 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व
26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और पहला गणतंत्र दिवस परेड आयोजित की गई। यह तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया था।
प्रधानमंत्री नेहरू ने बाद में अपने पत्रों और भाषणों में पहली गणतंत्र दिवस परेड को ऐतिहासिक और अत्यंत सफल बताया, जिसमें इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो सहित कई अंतरराष्ट्रीय अतिथि शामिल हुए थे।



