
AI Impact Summit 2026: भारत फरवरी 2026 में पहली बार AI Impact Summit की मेज़बानी करने जा रहा है। 15 से 20 फरवरी के बीच नई दिल्ली में होने वाले इस बड़े वैश्विक सम्मेलन से पहले प्री-समिट चर्चाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य और उसके नियंत्रण को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। इन बैठकों में सरकारी अधिकारी, नीति निर्माता, टेक इंडस्ट्री और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि शामिल रहे।
यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार यह मंच Global South में आयोजित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट का उद्घाटन करेंगे और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई अंतरराष्ट्रीय नेता और AI विशेषज्ञ इसमें भाग लेंगे।
प्री-समिट चर्चाओं में सबसे बड़ा मुद्दा यह रहा कि AI कंपनियों द्वारा किए गए स्वैच्छिक सेफ्टी वादे ज़मीन पर असरदार साबित नहीं हुए हैं। 2023 में ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क समिट में जिन कंपनियों ने अपने मॉडल रिलीज़ से पहले टेस्टिंग की अनुमति देने की बात कही थी, वे वादे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं थे और अब तक ठीक से लागू भी नहीं हो पाए हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कंपनियों और स्वतंत्र संस्थानों की प्राथमिकताएं अलग होती हैं, जिससे हितों का टकराव पैदा होता है। इसी वजह से समाज पर पड़ने वाले वास्तविक नुकसान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
एक और बड़ी बहस यह रही कि अक्सर कहा जाता है कि रेगुलेशन से इनोवेशन रुक जाता है, जबकि वक्ताओं का मानना था कि यह एक गलत सोच है। उनका कहना था कि इनोवेशन का मतलब सिर्फ बाजार में दौड़ नहीं, बल्कि लोगों के अधिकारों और सुरक्षा से भी जुड़ा होना चाहिए।
चर्चाओं में यह चिंता भी सामने आई कि AI कुछ बड़ी टेक कंपनियों के हाथों में ही सिमटता जा रहा है। इससे प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है और समाज के हितों को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर तब जब भारत जैसे देश AI को बड़े पैमाने पर अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।
प्री-समिट में सुझाव दिए गए कि सरकारों को ऐसे नियम बनाने चाहिए जो बाजार पर कुछ गिने-चुने खिलाड़ियों के कब्जे को रोकें। साथ ही AI नीति में मानवाधिकार को केंद्र में रखा जाए और छोटे संगठनों तथा आम लोगों की आवाज़ को भी जगह मिले।
यह भी चेतावनी दी गई कि AI के मामले में वही गलती न दोहराई जाए जो सोशल मीडिया के साथ हुई थी, जहां नियम बहुत देर से आए और तब तक नुकसान हो चुका था। डेटा सुरक्षा कानूनों से किसी भी हाल में समझौता न करने की बात पर भी ज़ोर दिया गया।
AI Impact Summit 2026 से पहले की ये चर्चाएं साफ संकेत देती हैं कि अब दुनिया सिर्फ तकनीक की रफ्तार नहीं, बल्कि उसके असर और जिम्मेदारी पर भी गंभीरता से सोच रही है। भारत के लिए यह मौका है कि वह AI गवर्नेंस में एक संतुलित और मानव-केंद्रित मॉडल पेश करे।


