New Delhi News-भारत ने जी4 की ओर से यूएनएससी में सुधार की ज़ोरदार मांग रखी

New Delhi News-भारत ने जी4 समूह की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की मांग को एक बार फिर मजबूती से उठाया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने यूएन सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) की बैठक में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान (G4) की ओर से छह बिंदुओं का स्पष्ट खाका प्रस्तुत किया।

इस प्रस्ताव का प्रमुख बिंदु सुरक्षा परिषद की सदस्य संख्या को मौजूदा 15 से बढ़ाकर 25 या 26 करने का है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र आज की वैश्विक चुनौतियों से अछूता नहीं है और उसकी विश्वसनीयता व प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद मौजूदा वैश्विक संघर्षों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने में असमर्थ साबित हो रही है, जिसका एक बड़ा कारण इसकी संरचनात्मक सीमाएँ और बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप सुधारों की कमी है। जी4 के अनुसार, सुधार की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो चुकी है।

बैठक में राजदूत पी. हरीश ने कहा कि सुधारों में देरी मानवीय पीड़ा को और बढ़ाएगी। जारी संघर्षों की भारी कीमत निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि परिणामहीन बैठकों के चक्र में उलझे रहने की कोई गुंजाइश नहीं है और प्रत्येक क्षण का सार्थक उपयोग आवश्यक है।

भारत ने जी4 के उस रुख को दोहराया जिसमें स्पष्ट समय-सीमा और मील के पत्थरों के साथ टेक्स्ट-आधारित वार्ता को केंद्रीय महत्व देने की बात कही गई है। जी4 ने एक समेकित मॉडल पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई, जो आगे चलकर टेक्स्ट-आधारित वार्ताओं का आधार बन सकता है।

जी4 ने सुधारित सुरक्षा परिषद के लिए अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि परिषद का विस्तार स्थायी और अस्थायी—दोनों श्रेणियों में होना चाहिए। प्रस्तावित मॉडल के अनुसार, छह नए स्थायी सदस्य जोड़े जाने चाहिए—

  • अफ्रीका से 2
  • एशिया-प्रशांत से 2
  • लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन क्षेत्र से 1
  • पश्चिमी यूरोप से 1

इसके साथ ही 4 या 5 अतिरिक्त अस्थायी सदस्यों को शामिल करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में ग्लोबल साउथ के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को एक गंभीर कमी बताते हुए कहा कि जी4 का यह मॉडल समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का बेहतर प्रतिबिंब है और इससे सुरक्षा परिषद अधिक प्रतिनिधिक, विश्वसनीय और प्रभावी बन सकेगी।

(रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी)

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