
नई दिल्ली। उत्तर रेलवे ने माननीय प्रधानमंत्री के मिशन कर्मयोगी के विजन को आगे बढ़ाते हुए लेखा विभाग के कर्मचारियों के लिए एक अनूठा क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया। “प्रशिक्षण से दक्षता की ओर” शीर्षक से यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 15, 16 और 19 जनवरी 2026 को आयोजित किया गया, जबकि इसका समापन समारोह 20 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में हुआ।
यह कार्यक्रम माननीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के “52 हफ्तों में 52 सुधार” के विजन से प्रेरित था, जिसका उद्देश्य रेलवे में एफिशिएंसी, गवर्नेंस और सर्विस डिलीवरी में व्यवस्थित सुधार लाना है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा देने तथा कर्मचारियों के स्किल डेवलपमेंट और टैलेंट मैनेजमेंट के नए तरीके विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
कर्मचारी-संचालित प्रशिक्षण बना खास पहचान
यह प्रशिक्षण पूरी तरह कर्मचारी-चालित सुधार मॉडल पर आधारित था, जिसका उद्देश्य माइक्रो-इनोवेशन, वर्क प्रोसेस में सुधार और बेस्ट प्रैक्टिस को संस्थागत रूप देना था। कार्यक्रम को छह थीमैटिक मॉड्यूल में बांटा गया, जिनकी अध्यक्षता संबंधित प्रिंसिपल हेड ऑफ डिपार्टमेंट ने की। इससे लेखा विभाग के विभिन्न सेक्शनों में रोजमर्रा की समस्याओं पर क्रॉस-फंक्शनल चर्चा और सामूहिक समाधान संभव हुआ।
450 से अधिक कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी
इस कार्यक्रम में 450 से अधिक रेलवे कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उत्तर रेलवे के प्रिंसिपल फाइनेंशियल एडवाइजर श्री संजय उप्रेती ने प्रशिक्षण से निकले सुधारात्मक सुझावों और इनोवेटिव आइडियाज की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्ट्रेस मैनेजमेंट और हार्टफुलनेस मेडिटेशन के माध्यम से पीक परफॉर्मेंस बढ़ाने पर भी विशेष सत्र लिया।
रेलवे बोर्ड और प्रबंधन की सराहना
रेलवे बोर्ड की मेंबर फाइनेंस श्रीमती अपर्णा गर्ग ने इसे उत्तर रेलवे का प्रगतिशील कदम बताते हुए आईटी-बेस्ड एप्लीकेशन, यूजर फीडबैक और स्टाफ इनपुट को संस्थागत बनाने पर जोर दिया। वहीं, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक श्री ए.के. वर्मा ने माइक्रो-इनोवेशन और बड़े वर्कफोर्स को जोड़ने वाले ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता को रेखांकित किया।



